South Korea Green Energy

उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ाना है SBTi के नए नेट जीरो मानक का उद्देश्य

in Op-ed

तमाम देश और कंपनियां सफल जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण नेट जीरो लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्ध हैं। ख़ास तौर से इसलिए क्योंकि पेरिस समझौते की वार्ताओं के आसपास अनिश्चितता अब भी बनी हुई है। इन लक्ष्यों को प्रमाणित करने के लिए कोई स्वतंत्र निकाय नहीं होने के कारण, एक "अच्छा नेट जीरो" वास्तव में कैसा दिखता है, और नेट जीरो प्रतिबद्धताओं के भीतर ऑफसेट करने की भूमिका के बारे में भयंकर विवाद रहा है। साइंस बेस्ड टारगेट्स इनिशिएटिव (SBTi) अपनी विज्ञान-आधारित नेट ज़ीरो स्टैंडर्ड के लॉन्च के साथ इसे बदलना चाह रही है। उम्मीद है कि यह एक बहुत ही गलत तरह से समझे जाने वाले शब्द, नेट जीरो, का उपयोग करके रणनीतियों के वैश्विक मानकीकरण की दिशा में पहला कदम है।

Freedom

कौन नहीं चाहता आजादी?

in Op-ed

कसी पराधीन जाति के लिये उसका राष्ट्रीय आदर्श ही उसके मनुष्यत्व, शक्ति, एवं पौरुष की एकमात्र कसौटी होता है। यह राष्ट्रीय आदर्श क्या है? यह राष्ट्रीय आदर्श है जाति की मुक्ति, जन्मभूमि की स्वाधीनता के लिये आकुल आकांक्षा। इस राष्ट्रीय आदर्श को अपने जीवन में सर्वान्तःकरण स्वीकार करके जो लोग उसकी वेदी के नीचे सर्वस्वार्पण करने, मुक्ति-संग्राम में योगदान देने के लिये प्रस्तुत रहते हैं, उन्हें ही हम देश के मुक्ति-कामी दल में परिगणित कर सकते हैं। इसके विपरीत जो लोग नाना प्रकार की युक्तियों की अवतरणा करके अथवा शान्ति, बन्धुत्व, विश्व प्रेम जैसे अति मधुर सिद्धांतों की दोहाई देकर स्वाधीनता-संग्राम से वितरत रहते हैं, उन्हें हम स्वाधीनता-कामी नहीं मान सकते। पराधीन देश में स्वाधीनता कामी और स्वाधीनता विरोधी इन दो दलों के सिवा बीच का कोई दल हो ही नहीं सकता। हम इतना ही जानना चाहते हैं कि कौन स्वाधीनता के पक्ष में है और कौन नहीं। अमरीका में जब स्वाधीनता संग्राम प्रवर्तित हुआ था, उस समय एक अमेरिकन इतिहास लेखक टामस पेन ने अमेरिका वासियों के लिये यही कसौटी उनके सामने रखी थी। उस समय अमेरिका में कुछ ऐसे लोग थे, जो अपने आभिजात्य, पद मर्यादा एवं ऐश्वर्य की रक्षा के लिये पूर्ण स्वाधीनता के नाम मात्र से सन्त्रस्त हो उठे थे। प्रश्न था इंगलैंड से सम्बंध विच्छेद करके स्वाधीनता लाभ की जाप अथवा इंग्लैंड की छत्रछाया में स्वराज्य प्राप्त किया जाए? इनमें पिछड़े विचार के समर्थक लोगों को उपदेश देते थे कि जिस देश के सम्पर्क में हम इतने दिनों तक रहे हैं, जिस सम्पर्क के फलस्वरूप हमारे देश की सब प्रकार से उन्नति हुई है, उसके साथ सम्बंध बनाए रखने में ही हमारा कल्याण निहित है। विरोध, कलह एवं राग-द्वेष से दूर रहकर प्रेम एवं बन्धुत्व का मार्ग ग्रहण करो। किन्तु इस प्रकार के उपदेशों के पीछे जो स्वार्थपरता, भीरूता एवं भण्डता छिपी हुई थी, वह बहुत दिनों तक अप्रकट नहीं रह सकी।

Carban

उत्सर्जन में तात्कालिक कटौती के लिए कदम न उठाना पड़ेगा G20 को भारी

in Op-ed

एक अध्ययन से पता चलता है कि कार्बन उत्सर्जन में तात्कालिक तौर से कटौती न करने की वजह से G20 देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है, और करना पड़ेगा।

इस नए अध्ययन में , G20 क्लाइमेट इम्पैक्ट्स एटलस वैज्ञानिक अनुमानों को एकत्रित करता है कि आने वाले वर्षों में दुनिया के सबसे अमीर देशों में जलवायु प्रभाव कैसे होगा। यह पाया गया है कि अधिक उत्सर्जन से जलवायु प्रभाव तेजी से बढ़ेगा जो G-20 को ऐसी क्षति का कारण बनेगा जो विनाशकारी होगा।

Climate Change

अमीर देश जलवायु परिवर्तन से निपटने को कम, सीमाओं के शस्रीकरण को दे रहे हैं ज्यादा तरजीह

in Op-ed

एक ताज़ा शोध में पाया गया है कि दुनिया के कुछ सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक देश जलवायु परिवर्तन से निपटने में उतना नहीं खर्च करते जितना अपनी सीमाओं के सशक्तिकरण पर खर्च करते हैं।   

COP 26 से पहले, अनुसंधान और एडवोकेसी थिंकटैंक ट्रांसनेशनल इंस्टीट्यूट (TNI) ने बॉर्डर हिंसा और जलवायु परिवर्तन के बीच की कड़ी पर नया शोध जारी किया है, जो हथियार और बॉर्डर सुरक्षा फर्मों को "जलवायु आपातकाल के मुनाफाखोर" के रूप में दर्शाता है।

Climate

जलवायु निष्क्रियता पड़ेगी भारी, मूलनिवासी जनजातीय समूहों के इस नेतृत्व ने बढ़ा दी है ऑस्ट्रलियाई सरकार की मुश्किलें

in Op-ed

जलवायु परिवर्तन की गंभीरता न समझने और उसके दुष्प्रभावों से निपटने के लिए निष्क्रियता दिखाना शायद ऑस्ट्रेलियाई सरकार को अब भारी पड़ेगा। दरअसल टोरेस स्ट्रेट के जनजातीय मूलनिवासियों का नेतृत्व जलवायु परिवर्तन से अपने समुदायों के विनाश को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलियाई संघीय सरकार को अदालत ले जा रहा है। इस घटनाक्रम में मुख्य भूमिका में टोरेस स्ट्रेट में ज़ेनदथ केस के गुडामालुलगल में बोइगू और साईबाई जैसे सुदूर द्वीपों के फ़र्स्ट नेशंस लीडर्स या मूलनिवासियों का नेतृत्व ऐसा कर रहा है।