पीएम मोदी ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘अटल टनल’ का किया उद्घाटन

Rohtang

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हिमाचल प्रदेश में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण, अटल सुरंग का उद्घाटन किया, जो मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ता है और लेह (केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख) में यात्रा का समय पांच घंटे तक कम कर देता है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाना, साथ ही हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी थे।

उस क्षण को ‘ऐतिहासिक दिन’ के रूप में वर्णित करते हुए और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सपने को साकार करते हुए सुरंग का नामकरण किया गया - सुरंग का नाम उनके नाम पर रखा गया है - पीएम मोदी ने कहा कि सुरंग भारत की सीमा अवसंरचना को मजबूत करेगी।

प्रधानमंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, ‘‘अटल सुरंग भारत की सीमा अवसंरचना को नई ताकत देगी। यह विश्वस्तरीय सीमा कनेक्टिविटी का एक उदाहरण है। सीमा बुनियादी ढांचे में सुधार करने की मांग की गई है, लेकिन लंबे समय तक, ऐसी परियोजनाएं या तो योजना से बाहर नहीं निकल पाईं या बीच में अटक गईं।


प्रधान मंत्री ने कहा, ‘‘यह सुरंग न केवल हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इसलिए भी है क्योंकि यह लद्दाख से जुड़ने की सुविधा देती है। जो लोग पहाड़ों में रहते हैं, उन्हें यात्रा के समय में चार या पांच घंटे की कटौती करने का महत्व पता होगा।’’ 

दुनिया में अपनी तरह के सबसे लंबे राजमार्ग निर्माण (10,000 फीट से ऊपर) के रूप में वर्णित, 9.02 किमी लंबी अटल सुरंग हिमालय कह पीर पंजाल रेंज में 3,000 मीटर (10,000 फीट) की ऊंचाई पर ‘अल्ट्रा-आधुनिक विनिर्देशों’ के लिए बनाई गई है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि यह आठ मीटर के रोडवेज के साथ एक घोड़े की नाल के आकार का, एकल-ट्यूब, डबल लेन सुरंग है और इसमें 5.525 मीटर की ओवरहेड निकासी है। सुरंग को प्रतिदिन 3,000 कारों और 1,500 ट्रकों के यातायात घनत्व के लिए डिजाइन किया गया है, जिनमें से प्रत्येक 80 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से यात्रा कर सकता है।

सुरंग का दक्षिण पोर्टल (एसपी) मनाली से 25 किमी की दूरी पर और 3,060 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। उत्तर पोर्टल (एनपी) लाहौल घाटी में 3,071 मीटर की ऊंचाई पर तेलिंग गांव के पास स्थित है। बता दें कि हिमाचल में रोहतांग दर्रे के नीचे एक रणनीतिक सुरंग बनाने का निर्णय 3 जून 2000 को लिया गया था, जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। साउथ पोर्टल तक पहुंच मार्ग की आधारशिला 26 मई, 2002 को रखी गई थी।

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