Roshni Land Scam (J&K): 25 हजार करोड़ का घोटाला, फारूक अब्दुल्ला सहित कई बड़े नाम शामिल

FarooqAbdullah

नई दिल्लीः केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जम्मू-कश्मीर के 25,000 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले में राज्य के कई बड़े नेताओं के नाम सामने आए हैं। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। जांच एजेंसी ने इस मामले में चौथा मामला दर्ज किया है। टाइम्स नाउ के मुताबिक, एजेंसी करोड़ों के भूमि अधिग्रहण मामले में पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला सहित राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका की जांच करेगी। 

रोशनी जमीन घोटाला जोकि 25 हजार करोड़ को है, को लेकर कई बड़े-बड़े नाम सामने आए हैं। इस लिस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के चीफ फारूक अब्दुल्ला सहित उनके कई सहयोगियों के नाम हैं। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश पर यूटी एडमिनिस्ट्रेशन और सीबीआई ने अभी तक जो जांच की है, उसके मुताबिक अब्दुल्ला ने 1998 में जम्मू डिवीजन के संजवान इलाके में अलग-अलग लोगों से 3 कनाल जमीन खरीदी, लेकिन साथ में आसपास की 7 कनाल जंगल की जमीन पर भी कब्जा कर उस पर घर का निर्माण कर लिया। फारूक अब्दुल्ला ने जिस 7 कनाल जमीन पर अवैध कब्जा किया, उसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपये हैं। इस इलाके में कुल मिलाकर जो 30 कनाल जमीन अवैध ढंग से अलग-अलग लोगों ने हड़प ली, उसकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपये है।

क्या है रोशनी घोटाला?
आपको बता दें कि 2001 में रोशनी एक्ट बना था। रोशनी एक्ट के तहत, अतिक्रमित राज्य भूमि को जम्मू और कश्मीर राज्य द्वारा नियमित किया जाना था और इस योजना के तहत एकत्रित धन का उपयोग राज्य के लोगों के लिए पनबिजली परियोजनाओं के लिए किया जाना था। हालांकि, ऑडिट एजेंसियां दावा करती हैं कि इस योजना का उपयोग अतिक्रमित कीमतों पर अतिक्रमित संपत्तियों को नियमित करने के लिए किया गया था और इस प्रकार जम्मू और कश्मीर राज्य भूमि (व्यवसायियों के स्वामित्व के अधिकार का उल्लंघन) अधिनियम, 2001 का उल्लंघन किया गया था, जिसके तहत धन का उपयोग जनता कल्याण के लिए किया जाना था। इस क़ानून के बहाने कश्मीर के बड़े-बड़े लोगों ने हजारों करोड़ के जमीन के वारे न्यारे किए अब सीबीआई जांच कर रही है। मामला हाई कोर्ट में है।

जम्मू-कश्मीर में ‘सबसे बड़ा’ भूमि घोटाला
जम्मू-कश्मीर में ‘सबसे बड़े’ घोटाले के रूप में, यह योजना फारूक अब्दुल्ला सरकार द्वारा शुरू की गई थी। जम्मू के राजनीतिक हलकों में दावे भी आरोपों की ओर इशारा करते हैं कि यह योजना जम्मू क्षेत्र में जनसांख्यिकीय परिवर्तन लाने के लिए थी। दस्तावेज दिखाते हैं कि कैसे नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेताओं ने अपने लाभ के लिए इस योजना का उपयोग किया।

जांच के बारे में बताते हुए, सीबीआई के प्रवक्ता आर के गौड़ ने पिछले हफ्ते कहा था कि आरोपों में सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है।

सीबीआई की जांच के मुताबिक, अब्दुल्ला ने इसके बाद जम्मू और श्रीनगर में विशेष रोशनी एक्ट का सहारा लेकर अपनी बहन सुरैया मट्टू और अपनी पार्टी के लिए अवैध रूप से जमीन आवंटित कराई। इसके अलावा उनके करीबी लोगों ने भी संजवान इलाके में वन और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया। इसमें खासतौर पर एनसी नेता सैय्यद अली अखून का नाम शामिल है।

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