प्राणायाम करें, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं, रहें निरोग

Yoga

वैश्विक महामारी कोरोना के इस दौर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनियां अपने उत्पादों के बारे में तरह-तरह के दावें कर रही हैं। ये उत्पाद हमारे लिए कितने उपयोगी हैं, यह निर्भर करेगा उनमें मौजूद विटामिनों, खनिजों और अन्य पोषक तत्वों पर। इनको खरीदने से पहले उत्पाद के संबंध में दिए गए किसी अधिकृत एजेंसी के प्रमाणन की जांच भी कर लेनी चाहिए। अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हमारे पास एक दूसरा महत्त्वपूर्ण विकल्प है- प्राणायाम। प्राणायाम हमारे ऋषि-मुनियों के अनुसंधान का प्रतिफल है, जो हमें निःशुल्क प्राप्त है। प्राणायाम से तात्पर्य है प्राणों का विस्तार अथवा नियमन करना। प्राण शक्ति केवल वायु (ऑक्सीजन) नहीं है। इसमें ब्रह्माण्ड में उपलब्ध जो भी ऊर्जा है, उन सबका सार है प्राण ऊर्जा। जब तक हमारे शरीर में यह प्राण ऊर्जा रहती है, तभी तक हमारा जीवन भी चलता रहता है। 

मनुष्य औसतन प्रति मिनट 15-16 बार श्वास लेता है और छोड़ता है। एक श्वास में हम लगभग 500 एमएल ऑक्सीजन ही अपने फेफड़ों तक पहुंचा पाते है। जबकि हमारे फेफड़ों की क्षमता 4000-4500 एमएल ऑक्सीजन से भी अधिक होती है। जब हमारे फेफड़ों तक पूरी ऑक्सीजन नहीं पहुंचेगी तो हम स्वस्थ कैसे रहेंगे। यदि हम प्राणायाम करेंगे तो एक श्वास में हम 4000-4500 एमएल ऑक्सीजन अपने फेफड़ों तक पहुंचा पाएंगे। इससे हमारे फेफड़े, हृदय और मस्तिष्क भी स्वस्थ रहेंगे। 

प्राणायाम विभिन्न प्रकार के हैं- भस्त्रिका प्राणायाम, कपालभांति प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी आदि। आज हम भस्त्रिका प्राणायाम की विवेचना करेंगे। भस्त्रिका शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘धौंकनी’। किस तरह एक लौहार धौंकनी में हवा भरकर फिर उसे छोड़कर अग्नि को और अधिक प्रज्वलित करता है ताकि लोहे को तपाकर उसकी अशुद्धियों को भस्म किया जा सके। उसी तरह हम अपनी दोनों नासिकाओं से श्वास को अंदर भरते हैं और फिर उसे उसी लय के साथ तेजी से बाहर छोड़ते हैं। इस प्रकार इस प्राणायाम में तेजी से श्वास को डायाफ्राम तक अंदर भरना होता है और तेजी से ही बाहर छोड़ना होता है। जिन्हें उच्च रक्तचाप, हृदय रोग आदि हो, उन्हें यह प्राणायाम धीमी गति से करना चाहिए, लेकिन करना सभी के लिए फायदेमंद है।

भस्त्रिका प्राणायाम करने से पहले अपने आसन के लिए किसी स्वच्छ स्थान का चयन कर लें। प्रातःकाल शुद्ध वायु में प्राणायाम करना अधिक लाभकारी होगा। अब अपने आसन पर किसी घ्यानापयोगी मुद्रा (पद्मासन, सिद्धासन अथवा जो भी आसन आपके लिए आरामदायक हो) में बैठें और कमर और सिर सीधा रखें। दोनों हाथ घ्यानमुद्रा में अपने घुटनों पर रखें। अपनी आंखें सहजता से बंद रखें। अब ढाई सेंकड में श्वास अंदर भरें और इतने ही समय में श्वास को बाहर छोड़ें। इसे बिना रूके निरंतर करते रहें। स्वस्थ व्यक्ति कम-से-कम 5 मिनट तक इस प्राणायाम को करें और जिन्हें कैंसर, लंग फाइब्रोसिस, एमएस, एसएलई आदि रोग हों, उन्हें कम-से-कम 10 मिनट तक यह प्राणायाम करना चाहिए।

प्राणायाम दृढ़ संकल्प, भाव, श्रद्धा के साथ करें और मन में यह विचार करें कि प्राणवायु के साथ दिव्य शक्तियां भी मेरे शरीर में प्रवेश कर रही हैं। मैं प्रतिपल स्वस्थ हो रहा हूं। जिस प्रकार का भाव मन में रखेंगे, उसी प्रकार का प्रभाव शरीर पर भी पड़ेगा। 

भस्त्रिका प्राणायाम से होने वाले शुद्ध लाभ संक्षेप में इस प्रकार हैंः

1. तीनों दोष- वात, पित्त और कफ को संतुलित रखता है।

2. रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

3. सर्दी-जुकाम, नज़ला, एलर्जी, अस्थमा आदि रोग दूर होते हैं।

4. शुद्ध वायु पर्याप्त मात्रा में अंदर जाती है और विषैली गैसें जैसे कार्बनडाईऑक्साइड श्वासों के माध्यम से बाहर छोड़ी जाती है। इससे फेफड़े स्वस्थ रहते हैं। 

5. हृदय और मस्तिष्क को शुद्ध प्राणवायु मिलती है और वे स्वस्थ बने रहते हैं।

6. निरंतर अभ्यास कुंडलिनी जागरण में मददगार होता है।

7. प्रतिक्रिया समय अर्थात् किसी भी उद्दीपक के प्रति प्रतिक्रिया के रूप में लिए गए समय में कमी आती है, जिससे तुरंत निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।

8. निम्न रक्तचाप की समस्या से मुक्ति मिलती है।

9. सर्दियों में ठण्ड से बचने के लिए शरीर को उष्णता प्रदान करता है।

10. रक्त शुद्ध होता है और प्रत्येक कोशिका को ऑक्सीजनयुक्त रक्त पूर्ण मात्रा में मिलता है।

11. श्वसन तंत्र सबल बनता है और गले से संबंधित अनेक रोगों से दूर रखता है।

Reading in english click Pranayam: Increase immunity and stay healthy

 

 

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