माली में फ्रांस की एयर स्ट्राइक, 50 से ज्यादा अलकायदा आतंकी ढेर

FAS

नई दिल्लीः फ्रांसीसी सरकार ने कहा कि सोमवार को उसकी सेनाओं ने केंद्रीय माली में हवाई हमलों में अलकायदा से जुड़े 50 से अधिक जिहादियों को मार गिराया है। फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पैरी ने माली की सरकार के सदस्यों से मुलाकात के बाद कहा कि यह हमला शुक्रवार को बर्किना फासो और नाइजर की सीमाओं के पास एक इलाके में हुआ, जहां सरकारी सेना इस्लामिक उग्रवाद को खत्म करने के लिए संघर्ष कर रही है। फ्रांस की सेना के प्रवक्ता कर्नल फ्रेडरिक बार्बरी ने बताया कि 4 आतंकी पकड़े गए हैं। एक फिदायीन जैकेट जब्त की गई है।

फ्रांस ने पिछले हफ्ते इस इलाके में जिहादियों के खिलाफ अभियान शुरू किया था। फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने कहा, “मैं एक ऐसे ऑपरेशन के बारे में बताना चाहूंगी जो बेहद अहम है। इसे 30 अक्टूबर को अंजाम दिया गया। इसके तहत 50 से अधिक आतंकियों को ढेर किया गया है और भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए हैं।”

सेना के प्रवक्ता बार्बरी ने यह भी बताया कि माली में आईएस आतंकियों की विंग ‘इस्लामिक स्टेट इन ग्रेटर सहारा’ के खिलाफ भी एक ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसमें 3000 सैनिकों को लगाया गया है। यह ऑपरेशन करीब एक महीने पहले शुरू किया गया था। इसके नतीजे आने वाले दिनों में बताए जाएंगे। यूनाइटेड नेशंस ने शांति अभियानों के तहत माली में 13 हजार सैनिकों की तैनाती की है। वहीं, फ्रांस ने इस इलाके में 5100 सैनिकों को तैनात किया है।

धार्मिक टकराव के कारण दो हफ्ते के अंदर हुए दो हमलों ने फ्रांस को हिलाकर रख दिया। पहले पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने वाले टीचर का सिर उन्हीं के छात्र ने कलम कर दिया था। इसके बाद नीस में चर्च के बाहर चाकू मारकर 3 लोगों की हत्या कर दी गई। शनिवार को भी एक अज्ञात बंदूकधारी ने चर्च में पादरी को गोली मार दी थी। इस मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है।

लगातार हो रहे हमलों के कारण सरकार ने फ्रांस में तैनात सैनिकों की संख्या दोगुनी कर दी है। मैक्रों ने इन घटनाओं को इस्लामिक आतंकवाद करार दिया था। इसके बाद से ही वे मुस्लिम देशों के नेताओं के निशाने पर हैं। कई देशों में फ्रांसीसी सामान के बहिष्कार के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।

एक मीडिया हाउस से बातचीत में फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा था कि पूरे मामले को गलत तरीके से समझा जा रहा है। वे पैगंबर मोहम्मद के कार्टून का समर्थन नहीं करते। इस कार्टून से कई लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसके बाद भी देश में अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा की जाएगी।

Comments   

0 #1 Rebecca 2020-11-04 05:26
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