उत्तर प्रदेश

कौन हैं किसान आंदोलन के अगुवा राकेश टिकैत? आइये जानते हैं उनके बारे में

नई दिल्लीः किसानों का आंदोलन अब एक दोराहे पर खड़ा हैं। यहां से दो ही रास्ते निकलते हैं – या तो किसान अपने घर जायें और या फिर पहले की तरह बार्डर पर जमे रहें। 26 जनवरी की हिंसक घटना के बाद कुछ किसान संगठनों ने अपने आपको इस आंदोलन से अलग भी कर लिया है। लेकिन भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) आंदोलन को खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं और वो अभी भी अपने समर्थकों के साथ दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बार्डर पर जमें हुए हैं। जब भी कोई किसानों का आंदोलन होता है तो राकेश टिकैत का नाम जरूर सामने आता है। क्या आप जानते हैं कि ये राकेश टिकैत के बारे में।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत कभी दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर थे। लेकिन आज वो करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। किसानों की राजनीति राकेश टिकैत को विरासत में मिली है। उनके दिवंगत पिता महेंद्र सिंह टिकैत (Mahendra Singh Tikait) भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष थे। उनके जाने के बाद राकेश टिकैत ने उनकी विरासत को संभाला है। राकेश टिकैत ने 2007 में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जिसमें वह हार गए थे। 2014 में फिर से उन्होंने अमरोहा जिले से राष्ट्रीय लोक दल के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वहां भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।

कौन है राकेश टिकैत?
राकेश टिकैत का जन्म 4 जून 1969 को उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली गांव में हुआ था। राकेश टिकैत ने मेरठ यूनिवर्सिटी से एम.ए. की पढ़ाई पूरी की। एमए करने के बाद उन्होंने एलएलबी की और वकील बन गए। 1992 में राकेश टिकैत दिल्ली में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। 

क्यों छोड़ी नौकरी?
1993-1994 में दिल्ली में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसान आंदोलन चल रहा था। जिसे खत्म करवाने के लिए सरकार ने राकेश टिकैत पर दबाव डाला कि वो अपने पिता को आंदोलन खत्म करने के लिए मनाएं। इसी दबाव में राकेश टिकैत ने अपना दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़ दी और किसान आंदोलन से जुड़ गए।

कितनी है इनकी संपत्ति?
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में राकेश टिकैत द्वारा दिए गए शपथपत्र के अनुसार, उनकी संपत्ति की कीमत 4 करोड़, 25 लाख, 18 हजार, 38 रुपये थी। 

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