Budget 2026: केंद्रीय बजट (Budget) 2026-27 की घोषणाओं के बाद, 1 फरवरी, 2026 से पूरे भारत में सिगरेट की कीमतों (Cigarette prices) में काफी बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने पुराने GST कंपनसेशन सेस को एक नए स्ट्रक्चर से बदल दिया है: अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी के साथ-साथ हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस, ये सब 40% के सबसे ऊंचे GST स्लैब के ऊपर है। यह लगभग सात सालों में पहली बड़ी तंबाकू टैक्स बढ़ोतरी है, जिसका मकसद खपत को कम करना, ग्लोबल पब्लिक हेल्थ नियमों के साथ तालमेल बिठाना और रेवेन्यू बढ़ाना है।
बढ़ोतरी के मुख्य कारण:
नई टैक्स व्यवस्था
अब एक्साइज ड्यूटी सिगरेट की लंबाई, फिल्टर के प्रकार और डिज़ाइन के हिसाब से अलग-अलग होगी (ज़्यादातर मामलों में ₹2.05–₹8.50 प्रति स्टिक अतिरिक्त ड्यूटी)।
प्रभावी तारीख
ये बदलाव 1 फरवरी, 2026 से लागू हुए, जब GST कंपनसेशन लोन चुका दिए गए (31 जनवरी, 2026 को खत्म)।
असर
मैन्युफैक्चरर्स/डिस्ट्रीब्यूटर्स यह बोझ ग्राहकों पर डाल रहे हैं, जिससे MRP में बदलाव हुआ है। पुराने स्टॉक पर नए GST रेट से बिलिंग हो रही है, और महीने के आखिर तक नए पैकेट आने की उम्मीद है।
कितने महंगे हुए?
कीमतें कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग हैं, लंबी/प्रीमियम वैरायटी पर ज़्यादा बढ़ोतरी हुई है:
सामान्य बढ़ोतरी: ज़्यादातर कैटेगरी में कम से कम ₹22–₹25 प्रति पैकेट।
छोटी सिगरेट (65 mm तक): बढ़ोतरी कम हुई है।
मीडियम सिगरेट (65–70 mm): मध्यम बढ़ोतरी।
प्रीमियम/लंबी सिगरेट (76 mm+): प्रति पैकेट ₹50–₹55 की सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी (ब्रांड के आधार पर)।
विल्स नेवी कट (76 mm): ~₹95 से ~₹120 तक।
गोल्ड फ्लेक लाइट्स, विल्स क्लासिक, विल्स क्लासिक माइल्ड्स (84 mm): ~₹170 से ₹220–₹225 तक।
क्लासिक कनेक्ट (स्लिम, 20 का पैकेट): ~₹300 से ~₹350 तक।
अल्ट्रा-प्रीमियम या नॉन-स्टैंडर्ड: कुछ मामलों में और भी ज़्यादा।
डिस्ट्रीब्यूटर्स (ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन – AICPDF के ज़रिए) चेतावनी देते हैं कि इससे स्मगलिंग, नकली प्रोडक्ट्स बढ़ सकते हैं और ई-कॉमर्स से मुकाबला करने वाली पारंपरिक किराना/रिटेल दुकानों को नुकसान हो सकता है।
यह बजट के “सिन गुड्स” अप्रोच (तंबाकू, शराब वगैरह पर ज़्यादा टैक्स) के हिसाब से है, जबकि कैंसर की दवाओं जैसी दूसरी चीज़ों को छूट मिली है। इस खबर के बाद वॉल्यूम/मार्जिन की चिंताओं के कारण ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई।

