Ceasefire Talks: खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए 15-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है। यह युद्ध 28 फरवरी को दोनों देशों के बीच परमाणु वार्ता विफल होने के बाद शुरू हुआ था।
दो पाकिस्तानी अधिकारियों ने बुधवार को एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ईरान को अमेरिका की ओर से युद्धविराम तक पहुंचने के लिए 15-सूत्रीय प्रस्ताव मिला है।
इस बीच, IRNA के अनुसार, पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोघद्दाम ने कहा कि अगर तेहरान और वाशिंगटन बातचीत के लिए सहमत होते हैं, तो पाकिस्तान बातचीत की मेजबानी करने के लिए “तैयार और सम्मानित महसूस करेगा।”
अमेरिका का क्या है प्रस्ताव?
पाकिस्तानी अधिकारियों ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव का मोटे तौर पर वर्णन करते हुए बताया कि इसमें प्रतिबंधों में राहत, नागरिक परमाणु सहयोग, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वापस लेना, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी द्वारा निगरानी, मिसाइल सीमाएं और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की आवाजाही की अनुमति जैसे मुद्दे शामिल हैं।
हालांकि, अभी और विवरण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया है कि किसी भी शांति समझौते में यह शर्त शामिल होनी चाहिए कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करे या नागरिक उद्देश्यों के लिए रेडियोधर्मी सामग्री का संवर्धन न करे।
सूत्रों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि यह योजना पाकिस्तान सरकार के मध्यस्थों द्वारा ईरान को सौंपी गई थी। पाकिस्तान ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच फिर से बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की है।
ईरान ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
Day 22 – Iran war updates:
Iran just wiped out Israel’s nuclear reactor! Game changer!
-Iran just wiped out the Dimona reactor
-Israel makes nuke bomb material here
-How does that radiation taste?
-Major injuries and casualties reported
-IDF getting wiped in southern… https://t.co/iNyOvgqEer pic.twitter.com/oDXhqkvAkP— Truth_teller 🇷🇺 (@Truthtellerftm) March 21, 2026
ईरान ने बातचीत का रुख कड़ा किया
तेहरान के वरिष्ठ सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया है कि अगर मध्यस्थता के प्रयासों से गंभीर बातचीत शुरू होती है, तो उनकी क्या मांगें होंगी।
मंगलवार को आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहे हैं, और वे अमेरिका से महत्वपूर्ण रियायतों की मांग करेंगे।
सूत्रों ने मंगलवार को रॉयटर्स को बताया कि अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत में, ईरान न केवल युद्ध समाप्त करने की मांग करेगा, बल्कि ऐसी रियायतें भी मांगेगा जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ‘रेड लाइन’ (अस्वीकार्य सीमाएं) हो सकती हैं – जैसे भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ गारंटी, युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर औपचारिक नियंत्रण।
सूत्रों ने यह भी बताया कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी तरह की सीमा तय करने के लिए बातचीत करने से इनकार कर देगा। यह एक ऐसा मुद्दा था जो पिछले महीने अमेरिका और इज़राइल द्वारा हमला किए जाने से पहले चल रही बातचीत के दौरान भी तेहरान के लिए एक ‘रेड लाइन’ बना हुआ था।
BREAKING; RUSSIA Warns: Expansion of IRAN War into Caspian Sea Would Be “Extremely Negative”
Russia has signaled strong opposition to any expansion of the Iran-Israel (and broader regional) conflict into the Caspian Sea, describing it as “extremely negative” for regional… pic.twitter.com/SPPgfvaidJ
— Global Surveillance (@Globalsurv) March 24, 2026
बातचीत को लेकर ट्रंप के मिले-जुले संकेत
ट्रंप ने सोमवार को कहा कि युद्ध शुरू होने के तीन सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद, वाशिंगटन ने तेहरान के साथ पहले ही “बहुत मजबूत बातचीत” की है; लेकिन ईरान ने सार्वजनिक रूप से इस बात से इनकार किया है।
ईरान के पाकिस्तान में राजदूत के हवाले से बुधवार को सरकारी मीडिया ने कहा, “तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कोई सीधी या परोक्ष बातचीत नहीं हुई है।” यह बात US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के विपरीत है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान कोई समझौता करना चाहता है।
तीन ईरानी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान ने पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के साथ केवल शुरुआती बातचीत की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या US के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत के लिए कोई ज़मीन तैयार है।
इन तीनों ईरानी सूत्रों ने बताया कि अगर ऐसी कोई बातचीत तय होती है, तो ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़ेर क़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची इसमें शामिल होने के लिए जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी आगाह किया कि कोई भी अंतिम फ़ैसला कट्टरपंथी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ही लेगा।
वहीं दूसरी ओर, ख़बरों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन आने वाले दिनों में 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के कम से कम 1,000 सैनिकों को मध्य-पूर्व में भेजने की योजना बना रहा है। इस योजना की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने एसोसिएटेड प्रेस को यह बात बताई।
पेंटागन दो मरीन यूनिट्स को भी तैनात करने की प्रक्रिया में है, जिससे इस क्षेत्र में लगभग 5,000 मरीन और हज़ारों नाविकों की संख्या बढ़ जाएगी।
(रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस के इनपुट के साथ)

