नई दिल्ली: भारत ने बचपन के आंखों के कैंसर रेटिनोब्लास्टोमा से पीड़ित लगभग हर बच्चे तक इलाज और देखभाल पहुंचाने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह देश में बचपन के कैंसर देखभाल के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। यह सफलता पिछले 10 वर्षों से चल रहे संयुक्त प्रयासों का नतीजा है। इस पहल का नेतृत्व ‘फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया’ ने किया, जिसे 2013 से ‘कैनकिड्स…किड्सकैन’ (CanKids…KidsCan) द्वारा संचालित किया जा रहा है।
इस मील के पत्थर का जश्न ‘राष्ट्रीय रेटिनोब्लास्टोमा सम्मेलन’ में मनाया गया, जो ‘अंतर्राष्ट्रीय रेटिनोब्लास्टोमा सप्ताह’ के दौरान नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में पूरे भारत से बाल ऑन्कोलॉजिस्ट, ऑक्युलर ऑन्कोलॉजिस्ट, नेत्र रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, शोधकर्ता, कैंसर से उबर चुके लोग, माता-पिता, सरकारी प्रतिनिधि, अस्पताल, नागरिक समाज संगठन और परोपकारी भागीदार एक साथ शामिल हुए।
सम्मेलन का विषय था: “पहुँच से लेकर जीवन रक्षा तक – भारत RB (रेटिनोब्लास्टोमा) से लड़ रहा है और हम जीत रहे हैं।”
जिसने रेटिनोब्लास्टोमा देखभाल के लिए एक सहयोगात्मक और रोगी-केंद्रित मॉडल बनाने में भारत की प्रगति को रेखांकित किया।
रेटिनोब्लास्टोमा आँखों का एक दुर्लभ, लेकिन पूरी तरह से ठीक हो सकने वाला कैंसर है, जो छोटे बच्चों को प्रभावित करता है। जीवन, दृष्टि और बचपन को बचाने के लिए इसकी शीघ्र पहचान और समय पर उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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पिछले एक दशक में, ‘फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया’ ने 90 से अधिक रेटिनोब्लास्टोमा उपचार केंद्रों का एक सहयोगात्मक नेटवर्क बनाने में मदद की है। यह नेटवर्क पूरे भारत में बाल ऑन्कोलॉजी और ऑक्युलर ऑन्कोलॉजी की विशेषज्ञता को एकीकृत करता है, जिससे बच्चों और परिवारों के लिए निदान, रेफरल मार्गों, उपचार तक पहुँच और देखभाल की निरंतरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
भारत सरकार के नीति आयोग (NITI Aayog) में स्वास्थ्य सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास ने मुख्य अतिथि के रूप में एक विशेष रिकॉर्डेड संबोधन दिया। उन्होंने भारत में रेटिनोब्लास्टोमा देखभाल तक लगभग सार्वभौमिक पहुँच हासिल करने पर सभी हितधारकों को बधाई दी।
डॉ. श्रीनिवास ने ‘फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया’ का वर्णन इस प्रकार किया:
“रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा के लिए हितधारकों के सहयोग का एक असाधारण मॉडल।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत दुनिया को यह दिखा रहा है कि सहयोगात्मक और रोगी-केंद्रित प्रणालियाँ, सीमित संसाधनों वाले परिवेश में भी बचपन के कैंसर की देखभाल तक लगभग सार्वभौमिक पहुँच को संभव बना सकती हैं।”
इस सम्मेलन में ‘फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया’ के सफर को ‘इंडियन जर्नल ऑफ़ ऑप्थल्मोलॉजी’ (IJO) में एक लेख के ज़रिए प्रकाशित भी किया गया।
“फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया: सामूहिक प्रयास, सहयोग और मरीज़-केंद्रित देखभाल का एक दशक”
यह प्रकाशन भारत के अनुभव को एक ऐसे उदाहरण के रूप में दिखाता है, जहाँ कम और मध्यम आय वाले देशों में मिलकर काम करने, अलग-अलग संस्थाओं के सहयोग और मरीजों को केंद्र में रखकर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ देने का सफल मॉडल तैयार किया गया।
इस सम्मेलन में इन संस्थाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया:
* INPHOG: सहयोगपूर्ण बहु-केंद्रित अनुसंधान और रजिस्टरों में।
* इंडियन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स (IAP): ‘रेड रिफ्लेक्स स्क्रीनिंग’ के प्रति जागरूकता के ज़रिए बीमारी का जल्दी पता लगाने की प्रक्रिया को मज़बूत बनाने में।
* ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी (AIOS): रेफरल और जागरूकता नेटवर्क बनाने में।
* और पूरे भारत में रेटिनोब्लास्टोमा का इलाज करने वाले 90 से ज़्यादा सहयोगी केंद्रों का योगदान।
सम्मेलन में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) की अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन ने कहा कि भारत में रेटिनोब्लास्टोमा और बच्चों की आंखों की दूसरी गंभीर बीमारियों की जल्दी पहचान के लिए ‘रेड रिफ्लेक्स स्क्रीनिंग’ को बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
सहयोग और रिसर्च की अहमियत बताते हुए डॉ. अमिता महाजन ने कहा कि INPHOG के इस बड़े अध्ययन में 21 केंद्रों के 1121 बच्चों को शामिल किया गया। इस रिसर्च ने दिखाया कि मिलकर काम करने वाले बाल कैंसर विशेषज्ञों का नेटवर्क रेटिनोब्लास्टोमा से पीड़ित बच्चों के इलाज के परिणाम बेहतर बना सकता है।
उन्होंने बताया कि इस अध्ययन में इलाज बीच में छोड़ने वाले बच्चों की संख्या घटकर करीब 7% रह गई। इससे साफ है कि सही इलाज, डॉक्टरों की टीम, मरीजों को लगातार सहयोग और बेहतर देखभाल व्यवस्था बच्चों को इलाज जारी रखने और उनकी जान बचाने में बड़ी भूमिका निभाती है।
इस कॉन्क्लेव का एक मुख्य फोकस भारत में रेटिनोब्लास्टोमा देखभाल का अगला पड़ाव था:
👉 100% वित्तीय सुरक्षा
👉 80–90% जीवित रहने की दर
👉 शुरुआती पहचान और रेफरल को मज़बूत बनाना
👉 राष्ट्रीय रेटिनोब्लास्टोमा हेल्पडेस्क और विशेषज्ञ नेटवर्क
👉 उन्नत डायग्नोस्टिक्स और उपचार तक बेहतर पहुँच
कॉन्क्लेव में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के निदेशक डॉ. पंकज अरोड़ा ने कहा कि भारत ने रेटिनोब्लास्टोमा के इलाज और देखभाल को ज्यादा बच्चों तक पहुंचाने में बड़ी प्रगति की है। उन्होंने कहा कि अब अगला लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे और उसके परिवार को इलाज के लिए पूरी आर्थिक मदद मिले और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं व मजबूत सहयोग के जरिए बच्चों के इलाज के परिणाम और बेहतर हों।
प्रतिभागियों ने मांग की कि रेटिनोब्लास्टोमा के इलाज के लिए आयुष्मान भारत और राज्य स्वास्थ्य योजनाओं को और मजबूत बनाया जाए। साथ ही, इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं और उपकरणों पर टैक्स और GST कम किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि रिसर्च और मरीजों के इलाज से जुड़े आंकड़ों पर ज्यादा काम होना चाहिए और स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों व कैंसर से ठीक हो चुके लोगों की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए।
खास बात यह है कि इस सम्मेलन में बीमारी से उबर चुके लोग और माता-पिता केंद्र में थे। रेटिनोब्लास्टोमा से उबर चुके लोगों के नेता और पैरोकार – अतुल राठौड़, प्रीति फड़, सुनीति, विकास यादव, शिवम दुबे – और माता-पिता की ओर से पैरोकार प्रीति रस्तोगी ने अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीं। उन्होंने बीमारी से उबरने के बाद के जीवन, गरिमा, जागरूकता, देखभाल की निरंतरता और अपने अनुभव के आधार पर नेतृत्व करने के महत्व पर ज़ोर दिया।
सम्मेलन में CanKids…KidsCan की संस्थापक अध्यक्ष पूनम बगई ने कहा कि रेटिनोब्लास्टोमा के खिलाफ लड़ाई ने यह साबित किया है कि जब डॉक्टर, माता-पिता, कैंसर से ठीक हो चुके लोग, शोधकर्ता, सरकार और समाज मिलकर बच्चों और उनके परिवारों के लिए काम करते हैं, तो बड़े बदलाव संभव होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत रेटिनोब्लास्टोमा के खिलाफ मजबूती से लड़ रहा है और इस लड़ाई में लगातार सफलता हासिल कर रहा है।
सम्मेलन के अंत में डॉ. संतोष होनवार ने कहा कि भारत का अगला लक्ष्य सिर्फ बच्चों की जान बचाना नहीं, बल्कि उनकी आंखों की रोशनी बचाना और इलाज के बाद उनके जीवन को बेहतर बनाना भी है। उन्होंने कहा कि रिसर्च और मरीजों के रिकॉर्ड को और मजबूत करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि रेटिनोब्लास्टोमा से पीड़ित हर बच्चे को बेहतर और आधुनिक इलाज समान रूप से मिल सके।
‘फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया’ ने भारत में रेटिनोब्लास्टोमा से पीड़ित हर बच्चे की जान बचाने, उसकी दृष्टि बचाने और उसके बचपन को बचाने की दिशा में मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया।

