दिल्ली/एन.सी.आर.

मुरादनगर श्मशान हादसाः नगरपालिका के 3 कर्मचारी गिरफ्तार, ठेकेदार फरार

नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के मुरादनगर शहर के एक श्मशान में एक शेड की छत रविवार को ढह जाने से कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई और एक दर्जन से अधिक घायल हो गए। एमएमजी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अनुराग भार्गव ने कहा कि गाजियाबाद और मुरादनगर के विभिन्न अस्पतालों में 13 लोगों का इलाज चल रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कुछ घायलों की हालत गंभीर है।

हिन्दुस्तान के मुताबिक, श्मशान हादसे में सोमवार को ईओ निहारिका सिंह, जेई चंद्रपाल सिंह और सुपरवाइजर आशीष को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ठेकेदार अजय त्यागी अभी फरार चल रहा है। शासन की सख्ती के बाद देर रात में ही मुरादनगर कोतवाली पुलिस ने नगर पालिका की ईओ, जेई, सुपरवाइजर और ठेकेदार के खिलाफ गैर इरातदन हत्या, काम में लापरवाही व भ्रष्टाचार आदि के आरोपों में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद ईओ, जेई और सुपरवाइजर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ठेकेदार की खोजबीन जारी है।

मृतक जयराम के पुत्र दीपक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में कहा गया है कि उनके पिता जयराम की शनिवार की रात मौत हो गई थी। अंतिम संस्कार के लिए उनके रिश्तेदार और पास पड़ोस के लिए श्मशान आए थे। जहां श्रद्धांजलि के दौरान बरामदे का लेंटर गिर गया। इसमें 23 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। उन्होंने अपनी तहरीर में आरोप लगाया है कि ईओ समेत अन्य अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया। जिसकी वजह से यह हादसा हुआ है। उन्होंने अपनी तहरीर में अधिकारियों को इस हादसे और हादसे में हुई मौतों को जिम्मेदार बताते हुए इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। 

ऐसे हुआ हादसा
मुरादनगर स्थित श्मशान घाट में रविवार को जयराम के अंतिम संस्कार के लिए परिवार और आस-पड़ोस के लोग आए थे। अंतिम संस्कार के बाद लोग जाने को तैयार थे तभी बरामदे की छत गिरने से हादसा हो गया। हादसा अचानक हुआ, जिससे लोगों को बचने का मौका ही नहीं मिला। वहां मौजूद घायलों का कहना है कि जो लोग लेंटर में दब गए उनकी आवाज नहीं सुनी और जो बच गए वह सदमें में हैं। हादसे के करीब एक घंटे बाद वहां एंबुलेंस पहुंची। इससे पहले वहां मौजूद लोगों ने मलबे में दबे कुछ लोगों को निकालकर नजदीक के अस्पताल में पहुंचाया। इसके बाद जेसीबी की सहायता से दीवार को हटाकर वहां दबे लोगों को निकाला गया। 

घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि अगर समय से कार्रवाई होती और सभी घायलों को समय से उपचार मिल जाता तो कई लोगों की जान बच सकती थी।

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