Carban

‘बेहद जोखिम भरे’ हैं अब निवेशकों के लिये कार्बन-सघन इन्फ्रास्ट्रक्चर

in Op-ed

वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में निम्‍न कार्बन के टिपिंग प्‍वाइंट्स को छू रही है। आने वाले दशक में सभी क्षेत्र जीवाश्‍म ईंधन से तेजी से छुटकारा पाने को तैयार हैं।

वैश्विक सततता कंसल्‍टेंसी ‘सिस्‍टेमिक’ के एक ताजा अध्‍ययन ‘द पेरिस इफेक्‍ट- सीओपी26 संस्‍करण’ (The Paris Effect - COP26 edition), के मुताबिक भारी कार्बन उत्‍सर्जन वाले किसी नये मूलभूत ढांचे पर निवेश करने का अब कोई औचित्‍य नहीं है। सभी प्रमुख सेक्‍टर वर्ष 2030 तक प्रदूषणमुक्‍त किफायती समाधान विकसित करने में सक्षम हैं। आज बनाये जाने वाले किसी भी कार्बन उत्‍सर्जक मूलभूत ढांचे पर भविष्‍य में गम्‍भीर सवाल खड़े होंगे।

Climate Change

'जलवायु परिवर्तन भारत के लिए बड़ी चुनौती'

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ग्लासगो में, 31 अक्टूबर से चल रहे, वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन को पृथ्वी के बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह ऐसा सम्मेलन है जहाँ, उम्मीद है, विश्व के नेता अतीत के अपने अधूरे वादों को भविष्य के लिए ठोस कार्यों में बदल देंगे। इसी सम्मेलन में प्रधान मंत्री मोदी जहाँ एक ओर भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्य की घोषणा की, वहीँ जलवायु परिवर्तन को भारत के लिए चुनौती भी बताया।

Carbonemission

कोविड-पूर्व स्तर पर पहुंचा वैश्विक कार्बन उत्सर्जन

in Op-ed

वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का स्तर कोविड-पूर्व के स्तरों के नज़दीक पहुंच चुका है, यह कहना है ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट द्वारा जारी कार्बन बजट के आंकड़ों के मुताबिक।

वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान जीवाश्म ईंधन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में 5.4% की गिरावट आई थी लेकिन नई रिपोर्ट में लगाए गए अनुमान के मुताबिक इस साल इसमें 4.9 फीसद की वृद्धि हुई है और इस तरह से यह अब कुल 36.4 बिलियन टन हो गया है। वर्ष 2021 में कोयले और गैस के इस्तमाल में और वृद्धि होने जा रही है जबकि तेल का प्रयोग वर्ष 2019 के स्तर से नीचे बना हुआ है।

Coalplant

COP26 में लिया गया यह फ़ैसला क्या भेजेगा कोयले को इतिहास की किताब में?

in Op-ed

यूनाइटेड किंगडम के नेतृत्व में, दुनिया के कुछ दो दर्जन देशों और अन्य संस्थानों ने, ग्लोबल कोल टू क्लीन पावर ट्रांजिशन स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर कर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई कोयला बिजली उत्पादन में सभी निवेशों को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है।

Climatechange

जलवायु परिवर्तन अनुकूल प्रयासों को करना होगा तेज़, वरना करना पड़ेगा व्यवधानों का सामना: संयुक्त राष्ट्र

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संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की एक नई रिपोर्ट में, ग्लासगो में जलवायु वार्ता के लिए इकट्ठा हुए राष्ट्राध्यक्षों द्वारा, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के अनुकूल होने के लिए वित्तपोषण और कार्यान्वयन को बढ़ाने के लिए तत्काल प्रयास करने का आह्वान किया गया है।