South Korea Green Energy

नेट ज़ीरो से पहले अल्‍पकालिक लक्ष्‍यों की तरफ ध्‍यान दे दुनिया: विशेषज्ञ

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ग्‍लासगो में अगले महीने आयोजित होने जा रही सीओपी26 बैठक में ‘नेट जीरो’ के लक्ष्‍य को लेकर खास चर्चा की सम्‍भावनाओं के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के विभिन्‍न देशों को ‘नेट जीरो’ के साथ-साथ अपने अल्‍पकालिक लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिये ठोस कार्ययोजना बनाकर काम करना चाहिये। वैश्विक स्‍तर पर जनहित से जुड़े इस मामले के लिये ‘एफर्ट शेयरिंग फॉर्मूला तैयार करने की जरूरत है और अनुकूलन के मुद्दे को बाजार पर नहीं डाला जाना चाहिये।

Climate

मुंबई समेत यह 50 देश हो जायेंगे दुनिया के नक्शे से ग़ायब, अगर...

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क्लाइमेट सेंट्रल नाम के एक गैर-लाभकारी समाचार संगठन ने कुछ हैरान करने वाली फ़ोटोज़ का एक सेट जारी किया है जो दिखाता है कि अगर जलवायु परिवर्तन संकट से निपटा नहीं गया तो दुनिया भर के कुछ सबसे प्रतिष्ठित स्थलों का क्या होगा।

क्लाइमेट सेंट्रल के नवीनतम शोध से पता चलता है कि वर्तमान उत्सर्जन मार्ग के तहत 3 डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग की ओर अग्रसर होने के कारण, दुनिया भर के लगभग 50 प्रमुख शहर अपने अधिकांश क्षेत्र को "सैकड़ों वर्षों तक चलने वाले समुद्र के स्तर में निरंतर वृद्धि" से खो देंगे। उनके शोध से पता चलता है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग को अनियंत्रित होने दिया गया तो आने वाले वर्षों में दुनिया की कई सबसे प्रतिष्ठित संरचनाएं पानी के नीचे होंगी। लेकिन अगर पेरिस जलवायु समझौते के सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल किया जाये तो इन जोखिमों के लगभग आधे से कम होने की संभावना है। रिपोर्ट की मानें तो एशिया में, ख़ास तौर से, चीन, भारत, वियतनाम और इंडोनेशिया में सबसे अधिक जोखिम में हैं।

Netzero

वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2021: उभरती ऊर्जा अर्थव्यवस्था 2050 तक नेट ज़ीरो के लिए नाकाफ़ी

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जिस रफ्तार से सौर और पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन आदि अन्य कम कार्बन प्रौद्योगिकियां फल-फूल रही हैं, उसके मद्देनज़र यह साफ़ है कि दुनिया में एक नई ऊर्जा अर्थव्यवस्था उभर रही है। लेकिन यह उभरती अर्थव्यवस्था नेट ज़ीरो के लक्ष्य हासिल करने के लिए काफ़ी नहीं। यह संकेत मिलता है COP26 से पहले, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा आज जारी वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक से, जो स्पष्ट करता है कि वैश्विक उत्सर्जन को नेट ज़ीरो की ओर बढ़ते हुए उसमें निरंतर गिरावट लाने के लिए मौजूदा गति अभी भी बहुत कम है।

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WHO के नये वायु गुणवत्‍ता मानकों पर खरा उतरने को भारत को करने होंगे सुनियोजित प्रयास

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विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के ज्‍यादातर देश वायु गुणवत्‍ता सम्‍बन्‍धी पुराने मानकों का ही पालन करने में नाकाम रहे हैं। ऐसे में विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा वायु गुणवत्‍ता के सम्‍बन्‍ध में जारी नये मानकों का पालन बहुत कड़ी चुनौती है। भारत जैसे देश को अगर इन मानकों पर खरा उतरना है तो उसे बहुक्षेत्रीय रवैया अपनाते हुए अधिक सुगठित, सुव्‍यवस्थित और समयबद्ध कदम उठाने होंगे। साथ ही मौजूदा नीतियों में जरूरी बदलाव करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्‍वयन पर भी ध्‍यान देना होगा।

FossilFuel

प्रति मिनट 13 मौतों का कारण बनता है जीवाश्म ईंधन का जलना, वायु प्रदूषण दहका रहा है जलवायु परिवर्तन की आग

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कोविड से उबरने के लिए WHO ने किये जलवायु कार्रवाई के दस आह्वान, बड़ी स्वास्थ्य आपदा को टालने के लिए वैश्विक स्वास्थ्य कार्यबल ने किया वैश्विक कार्रवाई का आग्रह

यदि देशों को COVID-19 महामारी से स्वस्थ और पर्यावरण अनुकूल रूप से उबरना है, तो उन्हें महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को निर्धारित करना चाहिए।