India-EU Free Trade Agreement: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement) दो या दो से ज़्यादा देशों या ग्रुप के बीच एक समझौता होता है, जिसमें सामान और सेवाओं पर टैरिफ, कोटा और दूसरी व्यापार बाधाओं को कम या खत्म किया जाता है, जिससे आसान क्रॉस-बॉर्डर कॉमर्स, निवेश और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा मिलता है।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लंबे समय से चल रही बातचीत को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहलाने वाला FTA कल यानी 27 जनवरी 2026 को India-EU Summit में आधिकारिक रूप से घोषित होने वाला है। आज (26 जनवरी, गणतंत्र दिवस) EU के दोनों प्रमुख नेता—Ursula von der Leyen (European Commission President) और António Costa (European Council President)—दिल्ली में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे, और उन्होंने इस डील की तारीफ की है।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की महत्वपूर्ण बातें
भारत-EU FTA पर लेटेस्ट जानकारी (26 जनवरी, 2026 तक):
स्टेटस: सालों की बातचीत के बाद बातचीत पूरी हो गई है (2022 में फिर से शुरू हुई, मूल रूप से 2007 में शुरू हुई थी)। नई दिल्ली में भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान आज या कल (26-27 जनवरी, 2026) एक आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है।
समय और संदर्भ:
EU नेता उर्सुला वॉन डेर लेयेन (यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष) और एंटोनियो कोस्टा (यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष) गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में भारत में हैं (उन्होंने आज कर्तव्य पथ पर परेड में हिस्सा लिया)।
27 जनवरी को होने वाले शिखर सम्मेलन में इस डील को अंतिम रूप दिया जाएगा, साथ ही सुरक्षा/रक्षा समझौते और कुशल श्रमिकों/छात्रों के लिए मोबिलिटी समझौते पर भी मुहर लगेगी।
अभी क्यों? वैश्विक व्यापार तनाव (खासकर मौजूदा प्रशासन के तहत अमेरिकी टैरिफ) ने इस प्रयास को तेज़ कर दिया है। यह 4 सालों में भारत का 9वां FTA है (UK, ओमान, न्यूज़ीलैंड, आदि के साथ समझौतों के बाद), जो संरक्षणवाद के बीच निर्यात में विविधता लाने में मदद करेगा।
पैमाना और प्रभाव
लगभग 2 अरब लोगों (भारत + EU के 27 देश) को कवर करता है।
संयुक्त अर्थव्यवस्था: लगभग $27 ट्रिलियन।
द्विपक्षीय व्यापार (सामान): वर्तमान में ~$136-137 बिलियन (भारत का सरप्लस है)।
उम्मीद है कि 90% से ज़्यादा कारोबार वाले सामानों पर टैरिफ खत्म हो जाएंगे, सेवाओं, निवेश और डिजिटल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
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मुख्य रियायतें
भारत कारों पर आयात टैरिफ को 110% से घटाकर 40% करेगा (धीरे-धीरे, €15,000 से ज़्यादा कीमत वाली EU कारों के लिए)। भारतीय एक्सपोर्ट के लिए फायदे: टेक्सटाइल, कपड़ों, फुटवियर, फार्मास्यूटिकल्स, स्टील, ज्वेलरी, पेट्रोलियम, मशीनरी पर कम ड्यूटी – जिससे US टैरिफ और खोए हुए EU GSP फायदों (2023/2026 से कई प्रोडक्ट्स के लिए सस्पेंड) का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।
सुरक्षा उपाय: भारत कृषि, डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टरों की रक्षा करता है।
EU को फायदे: कारों, वाइन, स्पिरिट, मशीनरी वगैरह के लिए भारत के बड़े बाज़ार तक बेहतर पहुंच।
आगे क्या? घोषणा → फाइनल टेक्स्ट को अंतिम रूप देना → पुष्टि (इसके लिए EU संसद की मंज़ूरी ज़रूरी है, इसमें 1 साल से ज़्यादा लग सकता है) → लागू करना (तुरंत नहीं)।
इस डील को भारत के एक्सपोर्ट ग्रोथ, ज़्यादा लेबर वाले सेक्टरों में रोज़गार पैदा करने और बदलते ग्लोबल गठबंधनों के बीच यूरोप के साथ रणनीतिक साझेदारी के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है।
अन्य प्रमुख भारतीय FTA में शामिल
UK के साथ (हाल ही में साइन किया गया)
ऑस्ट्रेलिया, UAE, EFTA (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, वगैरह)
जारी: कनाडा, GCC देशों, वगैरह के साथ।

