ऑस्कर विजेता निर्माताओं द्वारा बनाई यह फीचर फिल्म पोप फ्रांसिस की व्यक्तिगत कहानी की न सिर्फ एक अनदेखी झलक पेश करती है बल्कि वैश्विक जलवायु न्याय के लिए दबाव भी बनाती है
साल का वो समय आ चुका है जब धान की कटाई और पराली जलाने का मौसम शुरू हो रहा है। और ऐसा होने के साथ ही दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में वायु प्रदूषण पर बहस फिर से जोर पकड़ रही है। मगर इस बार जो बात हमेशा से अलग है और जिसके चलते इन क्षेत्रों के प्रभावित नागरिकों को उम्मीद की किरण दिख रही है वो यह है कि इस बार राज्य सरकारों में दोषी कौन पर बहस के बजाय कुछ असल कार्यवाई होने की ऊमीद है।
महामारी के बाद इस क्षेत्र में भारत ने वापसी की, मगर महिलाओं की भागीदारी अब तक के सबसे निचले स्तर पर
दुनिया के पांच महाद्वीपों के 10 में 8 बड़े बिजनेस लीडर्स का मानना है कि ‘नेट जीरो’ के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने और अर्थव्यवस्था को व्यापक तौर पर कार्बनमुक्त बनाने के लिए सशक्त नियमों की जरूरत है। यह निष्कर्ष हाल में ही किए गए एक सर्वे से निकलते हैं।
अगर ऊर्जा क्षेत्र में कोयले पर निर्भरता चरणबद्ध तरीके से की जाती है कम तो साल 2050 तक हो सकती है बिजली की कीमत आधी
जीवाश्म ईंधन आपूर्ति पर पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम, उत्पादन और संचय से होने वाले उत्सर्जन का पहला डेटाबेस हुआ प्रकाशित
रिन्यूबल एनर्जी (renewable energy) नामक पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित एक लेख से इस बात की प्रबल संभावना जाहिर हुई है कि दिल्ली वर्ष 2050 तक जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) से छुटकारा पाकर 100% अक्षय ऊर्जा पर निर्भरता का लक्ष्य हासिल कर सकती है। अपनी तरह के इस पहले शोध में दिल्ली जैसे उत्तर भारतीय महानगर में 100% अक्षय ऊर्जा प्रणालियों की तकनीकी साध्यता और आर्थिक व्यवहार्यता के बारे में बात की गई है।
जब ग्लासगो में प्रधानमंत्री मोदी ने COP 26 के दौरान जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खिलाफ़ वैश्विक जंग के संदर्भ में अंग्रेज़ी के शब्द LIFE के अक्षरों में छिपे एक मंत्र ‘लाइफ़स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ (Lifestyle for Environment) का उल्लेख किया था, तब वो महज़ उनके चिर-परिचित अंदाज़ वाला शब्दों का खेल नहीं था।
मिस्र के शर्म-अल-शेख में आगामी नवम्बर में आयोजित होने जा रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी27) से पहले विशेषज्ञों ने क्लाइमेट जस्टिस पर खास जोर देते हुए कहा है कि अगर इस पहलू पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो सीओपी जैसे तमाम मंच बेमानी माने जाएंगे।
इस साल के अंत तक भारत ने अपने लिए 175 गीगावाट की रिन्यूबल एनेर्जी क्षमता स्थापना का लक्ष्य रखा था। मगर बीती अगस्त तक भारत ने इस लक्ष्य का दो तिहाई हासिल किया है। मतलब दिसंबर तक लक्ष्य का एक तिहाई हासिल करना बाकी है।
पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, विशेष रूप से वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए, पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के डीकार्बोनाइजेशन में बहुत तेज प्रगति की आवश्यकता है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खिलाफ़ जारी इस वैश्विक जंग में प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार एक शीर्ष भूमिका निभाई है। बदलती जलवायु के प्रति उनकी चिंता और इस संवेदनशीलता और सजगता का उदाहरण भारत की राष्ट्रीय विद्युत नीति के ताज़े मसौदे में साफ झलकता है।
