छत्तीसगढ़

वनांचल के किसान कर रहे है बासमती धान की खेती

रायपुर : छत्तीसगढ़ में किसानों की आय में वृद्धि के साथ उच्च गुणवत्तायुक्त फसलों के उत्पादन के लिये एक्सटेंशन रिफॉर्म्स आत्मा योजनान्तर्गत कृषि विभाग द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में कोण्डागांव जिले के फरसगांव के भुमका, पासंगी, चिचाड़ी, भण्डारसिवनी और पतोड़ा के किसानों को प्रेरित कर जैविक तरीकों से बासमती धान की […]

रायपुर : छत्तीसगढ़ में किसानों की आय में वृद्धि के साथ उच्च गुणवत्तायुक्त फसलों के उत्पादन के लिये एक्सटेंशन रिफॉर्म्स आत्मा योजनान्तर्गत कृषि विभाग द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में कोण्डागांव जिले के फरसगांव के भुमका, पासंगी, चिचाड़ी, भण्डारसिवनी और पतोड़ा के किसानों को प्रेरित कर जैविक तरीकों से बासमती धान की उच्च गुणवत्तायुक्त फसलों का उत्पादन कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसके तहत् प्रारंभिक रूप से आत्मा योजनांतर्गत 50 कृषकों को शामिल कर उन्हें बासमती धान उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अतिरिक्त किसानों को धान की पारम्परिक खेती से वैज्ञानिक तकनीकों से कृषि करने हेतु प्रेरित करने के लिए श्री विधि द्वारा कतार में रोपाई कराकर निःशुल्क बीज एवं वर्मी कम्पोस्ट खाद का वितरण किया गया है। चूंकि वर्तमान बाजार में जैविक उत्पादों का उचित प्रतिफल प्राप्त हो जाता है, इसलिये किसानों को जैविक पद्धति से कृषि हेतु विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस संबंध में आत्मा के विकासखंड तकनीकी प्रबंधक टिकेशवर नाग ने बताया कि आत्मा योजनांतर्गत किसानों की आय बढ़ने से किसानों में हर्ष है। वे लगातार नई तकनीकें सीखने के लिये प्रेरित हो रहे हैं, जिससे कृषकों के मुनाफे में भी वृद्धि हो रही है।

कृषि विभाग द्वारा एक्सटेंशन रिफॉर्म्स आत्मा योजनान्तर्गत इस बार ग्राम पतोड़ा, भुमका, आलोर के किसानों ने पहली बार श्री विधि से जायद में रागी फसल लगायी गई है, जिसे लेकर किसानों में बहुत उत्साह देखा गया। इस संबंध में ग्राम पतोड़ा के किसान जेठू राम और अभिमन्यु ने बताया कि उन्होंने पहली बार श्री विधि से रागी का फसल लगाया गया है, जिससे कम खर्च में ज्यादा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है क्योंकि रागी की फसल में कम पानी की जरूरत होती है। ऐसे में उन्हें सिंचाई साधनों की अतिरिक्त आवश्यकता नहीं होती। विभाग द्वारा प्राप्त मार्गदर्शन एवं सहायता से उन्हें हौसला मिला है। उन्हें देखकर ग्राम के अन्य कृषक भी श्री विधि द्वारा रागी उत्पादन को प्रेरित हो रहे हैं।

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