लखीमपुर (असम): नगाओं जिले के रहा की एक घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। मजबूर होकर एक बहू ने अपने वृद्ध और बीमार ससुर को अपनी पीठ पर बिठाकर रहा अस्पताल ले गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। निहारिका दास ने पत्रकार को बताया कि वह अपने बीमार ससुर थुलेश्वर दास की पिछले कई दिनों से घर पर ही देखभाल कर रहीं थी। स्वास्थ्य में सुधार नही देख उसने सोचा कि उनका कोविड टेस्ट करा लें, क्योकि घर मे उसका 5 साल का एक बेटा और 18 महीने की एक बेटी है। यदि उसके ससुर संक्रमित हो गए तो समस्या हो जाएगी। उसके पति शिलीगुड़ी में और जेठ (भसुर) सिलचर में आजीविका के लिए रहते हैं। उसकी मदद करने वाला कोई अन्य व्यक्ति नहीं था। उसने 70 वर्षीय और अस्वस्थ ससुर को अपनी पीठं पर बांध लिया और रहा अस्पताल जाने के लिए चल पड़ी। करीब एक किलोमीटर जाने पर उसे एक गाड़ी मिली। जैसे तैसे उसने अपने ससुर को गाड़ी में बिठाया और रहा ले गई।
वहाँ पहुंचने पर अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें नगाओं अस्पताल जाने के लिए कहा। उसके लाख मिन्नत करने के बाद भी थुलेश्वर दास को भर्ती नहीं किया गया। जब वह नगाओं के मातृ मंगल अस्पताल पहुंची, तो वहाँ भी उसके ससुर को अस्पताल के अंदर ले जाने में कोई मददगार नहीं था। उसने फिर ससुर को पीठ पर लादा और अस्पताल की दूसरी मंजिल पर ले गई। ससुर की घर पर कई दिनों से सेवा करते रहने के कारण टेस्ट किये जाने पर दोनों का रिजल्ट पॉजिटिव आया। इस समय दोनों अस्पताल में है। उसके ससुर की हालत गंभीर हैं, वे ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।
निहारिका ने बताया कि वह अपने ससुर के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहती है। उसके लिए उसके ससुर अपने जन्मदाता माता-पिता से कही बढ़कर हैं। वह अपने ससुर की सेवा करने के साथ ही उनके स्वस्थ होने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती है।
आज जबकि कुछ लोग अपने वृद्ध माँ-बाप को वृद्धाश्रम या ओल्ड एज होम में भेज देते हैं। लेकिन, समाज मे निहारिका जैसी बहुएं भी हैं जो पिता और ससुर को समान महत्व देती हैं। ऐसी बहुएं नसीब वालों को ही मिलती है। आज समाज को जरूरत है निहारिका जैसी बहुओं की। उसने मिशाल पेश की है एक आदर्श बहू की। बहुएं निहारिका से प्रेरणा लें। ईश्वर से प्रार्थना है कि ससुर और बहू दोनों स्वस्थ होकर अस्पताल से अपने घर वापस आये।
