लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दूसरी लहर पर नियंत्रण के आंकड़े अब उत्साहजनक स्थिति में पहुंच गए हैं। दावा किया गया है कि प्रदेश को झकझोरने वाली दूसरी लहर पर लगभग काबू पा लिया गया है। साथ ही संभावित तीसरी लहर को नियंत्रित करने के लिए बड़े स्तर पर स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार कर ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया जा रहा है, कि संक्रमण को इसे भेदने का मौका ही न मिले। यह एक खुला तथ्य है कि कोरोना की दूसरी लहर के प्रति बेपरवाही का हमें खामियाजा भुगतना पड़ा है। हजारों जानें गईं, लोगों की माली हालत खस्ता हुई और आंशिक कफ्य ने समग्र अर्थव्यवस्था पर अधिक असर नहीं डाला लेकिन इसके दुष्परिणाम खुदरा कारोबारियों को उठाने पड़े हैं।
हालांकि, अब यह बीते दिनों की बात है। इसलिए अब बीती बातों से सबक लेकर आगे की सुधि लेने का समय है।शनिवार को स्वास्थ्य विभाग के जो आंकड़े आए हैं, वह यह बताने के लिए काफी हैं कि दूसरी लहर अब दम तोड़ रही है। शनिवार को प्रदेश के 75 में से 36 जिले ऐसे रहे जहां कोरोना का एक भी संक्रमित रोगी नहीं मिला। 37 ऐसे जिले रहे जहां 10 से भी कम मरीज मिले। अब सिर्फ प्रदेश की राजधानी लखनऊ और प्रयागराज ही ऐसे जिले हैं जहां 10 या उससे अधिक मरीज मिले। लखनऊ में नए मिलने वाले संक्रमितों की संख्या 17 और प्रयागराज में यह आंकड़ा 10 पर रहा। औसत रूप से देखें तो प्रदेश में 75 जिलों के मुकाबले 112 संक्रमित मिले। इसी तरह की जानकारी मृत्यु दर की है। शनिवार को सिर्फ सीतापुर और चंदौली में ही एक-एक मरीज की मौत हुई। एक्टिव केस, पाजिटिविटी रेट और रिकवरी रेट भी उत्साहजनक है। यही वजह है कि सोमवार से प्रदेश सामान्य कामकाज की ओर पूरी गति से लौटने लगेगा। राजस्व न्यायालयों की गतिविधियां भी शुरू की जा रही हैं और लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए थाना व तहसील दिवस जैसे प्रशासनिक आयोजन शुरू करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। इस हिदायत के साथ कि कोरोना से बचाव के उपायों का सख्ती से पालन करते हुए ही इसे फिर से शुरू किया जाए।
तीसरी लहर के लिए तैयार
रोजमर्रा की जीवनचर्या की इस शुरुआत का आशय यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि हम एक बार फिर निश्चिंत हो जाएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कहना बिल्कुल उचित है कि हम कोरोना पर नियंत्रण के नजदीक हैं, लेकिन सावधानी बरतने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। सरकार ने अपनी तरफ से पूरे इंतजाम किए हैं। कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों के सर्वाधिक प्रभावित होने की बात कही जा रही है। इस खतरे से निपटने के लिए प्रदेशभर में अब तक 6324 पीडियाटिक आइसीयू (पीकू) के बेड तैयार किए जा चुके हैं। जल्दी ही प्रधानमंत्री के द्वारा प्रदेश के देवरिया, एटा, फतेहपुर, गाजीपुर, हरदोई, जौनपुर, मीरजापुर, प्रतापगढ़ और सिद्धार्थनगर में नए तैयार मेडिकल कालेजों के लोकार्पण का कार्यक्रम भी तैयार है। संभवत: यह इसी माह शुरू हो जाएंगे। इनके लिए 70 फीसद फैकल्टी का चयन हो चुका है। 450 से अधिक संकाय सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है, जिसे जल्दी ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा भी 13 नए मेडिकल कालेजों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।
नियमों का करें पालन
कोई संदेह नहीं कि दूसरी विनाशकारी लहर के बाद प्रदेश सरकार ने जिस तेजी से तीसरी लहर को नियंत्रित करने की तैयारी की है, उसकी तारीफ की जानी चाहिए, लेकिन इन तैयारियों का अपेक्षित परिणाम तभी निकल सकता है जब आम नागरिक और ग्रामीण अपनी भूमिका को पिछले अनुभवों के आधार पर आचरण में उतारें। पहली लहर के बाद जिस तरह लोग लापरवाह हुए थे, उसकी अपेक्षा इस बार लोग भी जागरूकता दिखा रहे हैं। बाजारों में शारीरिक दूरी का पालन नहीं हो पा रहा। अब भी काफी संख्या में लोग मास्क को सही तरह से लगाने के प्रति सचेत नहीं दिख रहे। मास्क या तो ठोढ़ी या गर्दन पर अटका रहता है। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने में भी व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। आटो-टेम्पो और कम दूरी की बसों में शारीरिक दूरी का पालन तो कतई नहीं हो पा रहा। कुछ हद तक यह संसाधनों के अभाव की विवशता भी है, लेकिन ऐसी परिस्थिति में मास्क के सही उपयोग, खुद के सैनिटाइजेशन के साथ घर में दाखिल होने से पहले खुद को पहले पूरी तरह विसंक्रमित करने की प्रक्रिया में ढिलाई नहीं आनी चाहिए। उम्मीद की जानी चाहिए कि इन तैयारियों और हिदायतों के साथ यदि हम तीसरी लहर से मुकाबले के लिए मुस्तैद होंगे तो संभव है कि आशंकाओं पर विजय पायी जा सके। हालांकि सबसे महत्वपूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करना और बच्चों के लिए टीके का सफल होना आवश्यक है।

