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पं. राजन मिश्रा को संगीतमय नमन, बनारस घराने की परंपरा ने फिर छेड़े सुर

नई दिल्ली/वाराणसी: हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान स्तंभ और पद्मभूषण से सम्मानित स्वर्गीय पंडित राजन मिश्रा जी की स्मृति में “राजन मिश्रा की स्मृति में संगीतमय संध्या” शीर्षक से नई दिल्ली और वाराणसी में दो दिवसीय विशेष कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। ये आयोजन उनकी समृद्ध सांगीतिक विरासत और बनारस घराने की गौरवशाली परंपरा को समर्पित रहे।

इस संबंध में जानकारी देते हुए उनके सुपुत्र पंडित ऋतेश मिश्रा ने बताया कि नई दिल्ली के प्रतिष्ठित स्टीन ऑडिटोरियम, इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित संगीतमय संध्या में देश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रमुख कलाकारों में पंडित भोला नाथ मिश्रा (वोकल), अदनान खान (सितार), जूहेब अहमद खान (तबला), पंडित भारत भूषण गोस्वामी (सारंगी), जय शंकर मिश्रा (तबला) और जाकिर धोलपुरी (हारमोनियम) शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन राधिका मिश्रा ने किया तथा संयोजन रितभवी प्रोडक्शन्स द्वारा किया गया।

इसके उपरांत वाराणसी के सनबीम लहरतारा परिसर में आयोजित दूसरी संगीतमय संध्या में सुप्रसिद्ध गायिका दिव्या शर्मा और बनारस घराने के प्रख्यात गायक पं. अनुप मिश्रा ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सितार वादन में पं. नरेंद्र मिश्रा, तबला संगत में श्रीकांत मिश्रा एवं पं. राजेश मिश्रा तथा हारमोनियम पर पं. पंकज मिश्रा ने अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन अमित मिश्रा ने किया।

वाराणसी का यह आयोजन रसिपा (राजन-साजन मिश्रा इंस्टिट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स), सनबीम ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टिट्यूशंस एवं कला प्रकाश के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।

संगीत प्रेमियों के बीच एक भावुक माहौल भी देखने को मिला—जहां एक ओर पंडित राजन-साजन मिश्रा की अमर जुगलबंदी को मंच पर न देख पाने का गहरा दुख महसूस हुआ, वहीं दूसरी ओर पंडित साजन मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति और उनके सुपुत्र पंडित ऋतेश मिश्रा द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय संगीतमय संध्या ने उनकी यादों को पुनः जीवंत कर दिया। बनारस घराने की परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध और सांगीतिक संस्कारों की अनूठी छवि इन आयोजनों में स्पष्ट रूप से झलकी।

पंडित ऋतेश मिश्रा ने संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न केवल श्रद्धांजलि हैं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की उस अमूल्य धरोहर को सहेजने का प्रयास भी हैं, जिसे पंडित राजन मिश्रा जी ने अपने जीवनभर साधना और समर्पण से विश्व पटल पर स्थापित किया।