तपस्या पूरी हुई तब देवी के इस त्याग पर भगवान विष्णु ने कहा- कि आज से मुझे मेरे नहीं, आपके नाम से जाना जाएगा। संस्कृत में बद्री (बदरी) का अर्थ बेर होता है, इसलिए श्रीहरि बद्रीनाथ (Shrihari Badrinath) कहलाए।
इस पौराणिक कथा की मानें तो एक तरह से क्रोधासुर श्री गणेश का भाई ही था, क्योंकि वो शिव जी के स्खलन से जन्मा उनका ही अंश था। उसी को नियंत्रित करने के लिए गणपति ने लंबोतर के रूप में अवतार लिया था
शामलाजी (Shamlaji) भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) के तीन प्रमुख मंदिरों में एक है, जो गुजरात (Gujarat) के अरावली जिले (Aravalli...
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