दरअसल आर्थिक और राजनीतिक निर्णयों ने मुख्य रूप से प्रकृति के कुछ ही मूल्यों को प्राथमिकता दी है। इनमें विशेष रूप से प्रकृति के बाजार-आधारित मूल्य, जैसे खाद्य पदार्थ, प्राथमिकता पाते हैं। इसके अलावा, नीति निर्धारण कि प्रक्रिया में आमजन के लिए प्रकृति के योगदान से जुड़े कई गैर-बाजार मूल्यों की अनदेखी होती है, जैसे कि जलवायु विनियमन और सांस्कृतिक पहचान।
