भारी सुरक्षा के बीच जुलूस निकालने के दौरान विभिन्न हिंदू संगठनों के लगभग 1,000 प्रदर्शनकारियों ने भगवा झंडे लिए और न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए। मंगलवार को जिस इलाके में भीषण हत्या हुई थी, उस इलाके के पास प्रदर्शनकारियों के चले जाने से तनाव चरम पर था। पुलिस ने आक्रोशित भीड़ को तितर-बितर किया।
सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में की। मुख्यमंत्री ने मृतक के आश्रित परिवार को 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की भी घोषणा की, जिसकी पहचान कन्हैया लाल के रूप में हुई है। नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले एक सोशल मीडिया पोस्ट पर हिंदू दर्जी की हत्या कर दी गई।
कन्हैया लाल (Kanhaiya Lal) ने 15 जून को उदयपुर (Udaipur) पुलिस में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं, लेकिन पुलिस ने मामले की गंभीरता को नहीं समझा और इसके बजाय दोनों पक्षों के बीच एक समझौता करवाने की कोशिश की। जिसका खामियाजा कन्हैया लाल को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हलसीमुद्दीन कासमी ने उदयपुर में नृशंस हत्या की घटना की निंदा की और कहा कि जाहिर तौर पर पैगंबर के अपमान के बहाने देश के कानून के खिलाफ और धर्म के खिलाफ किसी को भी इस तरह की कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है।
