उत्तर-पूर्वी भारत की रहने वाली सुमाया हजारिका (Sumaya Hazarika) फैशन की दुनिया में तेजी से अपना नाम बना रही हैं। सेंट सिंट्रा के 2022 न्यूयॉर्क फैशन वीक (New York Fashion Week) में रैंप पर आने वाली युवा मॉडल ने लंदन, लॉस एंजिल्स, दुबई, भारत और टोक्यो में काम किया है।
यूँ तो हम भी कोई बहुत पुरानी चीज नहीं हुए, पर वे दिन जरूर पुराने थे जब किसी के मुस्कुराने...
यदि आप इतिहास के शौकीन हैं, तो आपको दिल्ली में इन 8 ऐतिहासिक स्थानों की जाँच अवश्य करनी चाहिए, जो बिल्कुल आश्चर्यजनक हैं और फिर भी बहुत प्रसिद्ध नहीं हैं!
पैतृक संपत्ति पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
1964 में एमआईटी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एक कंप्यूटर प्रोग्राम पर काम कर रहे थे। अपने समय से इतना आगे का कार्यक्रम कि यह मनुष्यों और मशीनों के बीच निर्बाध संचार की अनुमति देगा।
वे अपनी कामयाबी में मातापिता और दर्शकों को सब से अहम मानती हैं। नीलू शंकर सिंह की फिल्मों में ‘बेटवा बाहुबली’, ‘लाज्जो’, ‘लव के लिए कुछ भी करेगा’ खास हैं। उन की आने वाली फिल्मों में ‘हाफ मैंटल’, ‘प्रेम युद्ध’, ‘दिल दीवाना प्यार में’, ‘बलवान’, ‘शक्ति’ और ‘छोरा छिछोरा बा’ अहम हैं। सामान्य परिवार की लड़की का फिल्मों में काम करना कितना मुश्किल होता है?
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) हमेशा घूमनेवालों के सबसे प्रिय राज्यों में से एक है और रहेगा। खूबसूरत झरने, साफ-सुथरे पहाड़, राज्य के खास अल्पाइन आकर्षण और स्थानीय मिलनसार लोगों ने हिमाचल को एक खास पयर्टन स्थल बनाया है।
एशिया के सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में से एक, अपोलो हॉस्पिटल्स समूह ने अपोलो क्लीनिकल इंटेलिजेंस इंजन के लॉन्च की घोषणा की है।
2021-22 में वैश्विक दुग्ध उत्पादन में 24% योगदान देने वाला देश : रूपाला
इस वर्ष अप्रैल से जुलाई के बीच क्रिस ने तक उत्तर-पूर्व के राज्य त्रिपुरा में 17 स्थानों पर फालुन दाफा की 40 से अधिक कक्षाओं का आयोजन किया। इसमें 15 स्कूलों के अलावा एक विश्वविद्यालय और एक मंदिर शामिल थे। दस स्थान राजधानी अगरतला के बाहर थे। इस दूरस्थ क्षेत्र के लोगों ने फालुन दाफा के बारे में या चीन में इसके अभ्यासियों पर हो रहे दमन के बारे में कभी नहीं सुना था।
बिग बॉस में जलवा बिखेर रही जयपुर की बेटी प्रियंका चौधरी की पहली फिल्म “बुरहान हीरो या विलेन” मास्क टीवी पर होगी रिलीज
पिछले 15 सालों में सर्कस कराने वाले संस्थाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से कमी आई है। 15 साल पहले भारत में 350 से भी ज्यादा सर्कस थे, परन्तु वर्तमान में यह संख्या घटकर मात्र 11 से 12 हो चुकी है। सर्कस का यह आंकड़ा निश्चित रूप से आश्चर्यजनक है। इतनी भारी संख्या में सर्कस का बंद होना हुनरमंद कलाकारों के लिए रोजीरोटी की समस्या उत्पन्न कर रही है।












