Europe Heatwave: फ्रांस से स्पेन तक गर्मी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

Europe Heatwave: यूरोप इस समय हाल के वर्षों की सबसे भीषण हीटवेव (लू) की चपेट में है। इसी बीच शुक्रवार को प्रकाशित एक नई स्टडी में खुलासा हुआ कि फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन और दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान सामान्य मौसमी औसत से 5°C से 12°C तक अधिक दर्ज किया गया।

‘वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन’ के शोधकर्ताओं के अनुसार, इस बार की जून हीटवेव को सबसे खतरनाक बनाने वाला कारण केवल दिन का अत्यधिक तापमान नहीं, बल्कि रात में भी लगातार बनी रहने वाली गर्मी और अधिक उमस है। इससे लोगों के शरीर को ठंडा होने का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कई गुना बढ़ गए हैं।

यूरोप की रिकॉर्डतोड़ हीटवेव ने बढ़ाई चिंता
18 जून से शुरू हुई हीटवेव के विश्लेषण के लिए शोधकर्ताओं ने तापमान डेटा और मौसम पूर्वानुमानों का अध्ययन किया। इसके आधार पर निष्कर्ष निकाला गया कि यह अब तक यूरोप में दर्ज की गई सबसे भीषण और सबसे अधिक नमी (ह्यूमिडिटी) वाली हीटवेव है।

यूरोपीय संघ की ‘कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस’ के अनुसार, यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जहां 1980 के दशक से तापमान में वृद्धि की दर वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी रही है।

हीटवेव की वजह अल-नीनो नहीं, क्लाइमेट चेंज
स्टडी के को-ऑथर और इंपीरियल कॉलेज लंदन में रिसर्च एसोसिएट, थियोडोर कीपिंग ने कहा, “यह साल के किसी भी समय के लिए सबसे भीषण हीटवेव थी, न कि सिर्फ़ जून के लिए।” उन्होंने आगे कहा, “जून का महीना किसी भी दूसरे महीने की तुलना में तेज़ी से गर्म हो रहा है और अब ऐसे तापमान के नियमित रूप से होने की उम्मीद है,” ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट किया। रिसर्चर्स ने बहुत ज़्यादा तापमान के लिए क्लाइमेट चेंज को ज़िम्मेदार ठहराया और उभरते हुए अल-नीनो पैटर्न के चक्रीय असर को खारिज कर दिया।

45% यूरोपीय शहरों में रिकॉर्ड हीट स्ट्रेस
स्टडी से पता चला कि 30 यूरोपियन देशों के 854 शहरों में से कुल 45% शहरों में ‘वेट-बल्ब ग्लोब टेम्परेचर’ का रिकॉर्ड पहले ही बन चुका है या कुछ समय में टूटने की उम्मीद है। गौरतलब है कि ‘वेट-बल्ब ग्लोब टेम्परेचर’ गर्मी के तनाव और पसीने के ज़रिए शरीर के खुद को ठंडा करने की क्षमता को मापता है।

रेड क्रॉस रेड क्रिसेंट क्लाइमेट सेंटर की रिसर्चर और स्टडी की को-ऑथर, कैरोलिना परेरा ने कहा, “बहुत से लोग अभी भी ऐसी जगहों पर रहते, काम करते और पढ़ाई करते हैं जो उन तापमानों के हिसाब से नहीं बनी हैं जिनका हम अभी सामना कर रहे हैं।”

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हीटवेव से कैसे निपट रहे हैं यूरोपीय देश?
जब लोगों ने नदियों, झीलों और नहरों में राहत पाने की कोशिश की, तो जर्मनी और फ्रांस में डूबने की कई घटनाएँ सामने आईं; फ्रांस में एयर कंडीशनिंग का इस्तेमाल बहुत ज़्यादा नहीं होता है। भीड़ को ठंडा रखने और गर्मी से होने वाली थकान और जानलेवा हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए एफिल टॉवर जैसी मशहूर टूरिस्ट जगहों पर ‘मिस्टिंग स्टेशन’ (ठंडी फुहार छोड़ने वाले स्टेशन) लगाए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पिछले चार सालों में पूरे यूरोप में गर्मी से जुड़ी वजहों से 2,00,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है।

हीटवेव पर फ्रांस का रेड अलर्ट, स्कूल बंद
फ्रांसीसी सरकार ने “रेड अलर्ट” वाले इलाकों में शराब पीने पर रोक लगा दी, ताकि “आपातकालीन सेवाओं को बनाए रखा जा सके और मेडिकल स्टाफ़ सबसे ज़्यादा कमज़ोर लोगों की देखभाल पर ध्यान दे सके।” अधिकारियों ने भीषण गर्मी के बीच न सिर्फ़ स्कूल बंद करने का ऐलान किया, बल्कि जंगल की आग से निपटने की तैयारी के लिए आपातकालीन सेवाओं और सेना को भी तैनात किया। इसके अलावा, फ्रांसीसी सरकार फ्रांस के कई परमाणु रिएक्टरों को पानी की सप्लाई पर भी नज़र रख रही है।

इस बीच, स्पेन के अधिकारियों ने आउटडोर खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी, जबकि इटली और यूके ने गर्मी को लेकर चेतावनी जारी की।

(एजेंसी इनपुट के साथ)