नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय एजेंसियों से भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को मजबूत करने का आह्वान किया और कहा कि देश के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं होना चाहिए। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के एक संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए, मोदी ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य ‘अनुपालन (compliances) और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की आवश्यकता को और कम करना है, जोकि ‘भ्रष्टाचार के जाल’ में मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने आभासी संबोधन के दौरान कहा, ‘‘आपको भ्रष्टाचार के लिए शून्य सहिष्णुता की न्यू इंडिया की नीति को मजबूत करने की आवश्यकता है। आपको कानूनों को इस तरह से लागू करने की आवश्यकता है कि गरीब जनता सिस्टम के करीब आ जाएं और भ्रष्ट इससे बाहर निकल जाएं।’’ सम्मेलन एक नए भारत के इर्द-गिर्द था जो भ्रष्ट प्रथाओं को पीछे धकेलने के लिए डिजिटल उपकरणों का तेजी से उपयोग कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले छह-सात वर्षों में लोगों के बीच विश्वास स्थापित किया है कि भ्रष्टाचार से लड़ना और बिचौलियों की भागीदारी के बिना विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभ प्राप्त करना संभव है।
उन्होंने कहा, “पिछले छह-सात वर्षों में, हम लोगों के बीच विश्वास स्थापित करने में सक्षम हैं कि देश में भ्रष्टाचार को रोकना संभव है। देश के लोगों को आज विश्वास है कि उन्हें बिना किसी बिचौलिए के सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।’’
उन्होंने सीबीआई और सीवीसी के अधिकारियों से राष्ट्रीय जीवन के सभी क्षेत्रों से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए खुद को फिर से समर्पित करने का आह्वान किया और कहा कि भ्रष्टाचार लोगों के अधिकारों को छीन लेता है और सभी के लिए न्याय की खोज में बाधा डालता है।
पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत अब भ्रष्ट शासन नहीं चाहता। पहले, जिस तरह से सरकारें और व्यवस्थाएं थीं, उनमें राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों तरह की इच्छाशक्ति का अभाव था। आज भ्रष्टाचार पर प्रहार करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति है और प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार सुधार किया जा रहा है।
उन्होंने नागरिकों को यह भी याद दिलाया कि सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करना और निभाना उनकी जिम्मेदारी है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
