इसके साथ भारत हुआ उन 60 देशों की विशिष्ट सूची में शामिल जिन्होंने अब तक सौंपे हैं UNFCCC को अपनी रणनीति
इस बात में दो राय नहीं कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस एमिशन (Greenhouse Gas Emissions) में वृद्धि हुई है, लेकिन पिछले दशक के औसत के मुक़ाबले यह बहुत कम मात्रा में हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का तो मानना है कि रिन्यूबल बिजली उत्पादन और इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से बढ़ते चलन ने एमिशन की इस वृद्धि के पैमाने को संभवत दो-तिहाई तक कम कर दिया है।
तमाम वैश्विक संस्थानों और सरकारों के लिए नेट ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने को सुगम बनाते हुए इंटेरनैशनल स्टैंडर्ड्ज ऑर्गनाइज़ेशन, आईएसओ, ने आज बहुप्रतीक्षित नेट जीरो दिशानिर्देश प्रकाशित किए हैं।
वैश्विक गठबंधन आर्थिक, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु चुनौतियों से निपटते हुए लक्ष्यों को कार्रवाई में बदलने और रिन्यूएबल ऊर्जा कार्यान्वयन अंतर को पाटने में निभाएगा प्रमुख भूमिका
वर्ष 2022 की पहली छमाही में ही जीवाश्म ईंधन की लागत से 34 बिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च बचाया गया
कुछ ही दिनों में दुनिया के नीति निर्माता ईजिप्ट के शर्म अल शेख में संयुक्त राष्ट्र के अगले जलवायु सम्मेलन, सीओपी 27, में मिल कर पूरी पृथ्वी पर जलवायु कार्यवाही के लिए कुछ अहम फैसले लेंगे। और ठीक उससे पहले पिछले कुछ समय से G7 और उसके सहयोगियों ने वियतनाम, इंडोनेशिया और भारत को कोयले से दूर होने के लिए अरबों डॉलर की पेशकश की है। लेकिन अभी तक इस दिशा में खास बढ़त नहीं देखी गयी।
ऊर्जा नामक इस संस्था ने किया वायु प्रदूषण, नागरिक मुद्दों, और शासन से संबंधित एक इच्छा सूची के साथ अपना घोषणापत्र जारी
अगर एमिशन के मौजूदा स्तर बने रहे तो अगले नौ वर्षों के दौरान ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) में वृद्धि के डेढ़ डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर जाने की आशंका 50% तक बढ़ जाएगी।
उर्वरक कम्पनियां कमाएंगी 84 बिलियन डॉलर का मुनाफा
मैंग्रोव वनों को दुनिया का "सबसे अधिक उत्पादक पारिस्थितिक तंत्र" करार देते हुए, भारत मंगलवार को मिस्र के शर्म अल-शेख में पार्टियों के सम्मेलन (COP27) के 27वें शिखर सम्मेलन में जलवायु के लिए मैंग्रोव गठबंधन (MAC) में शामिल हो गया। इस गठबंधन को यूएई, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, जापान, स्पेन और श्रीलंका का समर्थन प्राप्त है।
फिलहाल जहां दुनिया के शीर्ष नेता मिस्त्र में चल रही सीओपी 27 में वैश्विक जलवायु नीतियों पर चिंतन मनन कर रहे...
आईईए के वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक (World Energy Outlook) के ताजा संस्करण के मुताबिक युक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण उत्पन्न हुआ वैश्विक ऊर्जा संकट गहरे और लम्बे वक्त तक बरकरार रहने वाले बदलावों की वजह बन रहा है। इन परिवर्तनों में ऊर्जा प्रणाली में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित रूपांतरण को तेज करने की क्षमता रखते हैं।
