उत्सर्जन में कटौती के बिना, ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना पहुंच से बाहर है। इस काम के लिए ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की आवश्यकता है और जीवाश्म ईंधन के उपयोग में भारी कमी लानी होगी ।
दुनिया भर में कुल बिजली उत्पादन में विंड और सोलर का हिस्सा दस फीसद से ज़्यादा, 2015 के बाद से हुआ दोगुना
IPCC ने अब तक बढ़ते तापमान के कारणों, चुनौतियों और प्रभावों का विवरण देने वाली रिपोर्ट के दो सेट जारी किए हैं
दुनिया की सबसे बड़ी कोरल रीफ़ (Coral Reef), द ग्रेट बैरियर रीफ (The Great Barrier Reef), एक बार फिर खबरों में है। और यह खबर बुरी है।
जब हम जलवायु परिवर्तन और उसकी वजह से होने वाले जोखिम की बात करते हैं तो यह बात सामने आती है कि फाइनेंस को अधिक महत्वपूर्ण पहलू के तौर पर सामने रखा जाए।
पांच साल पहले यूपी की बागडोर संभालने के बाद से, योगी आदित्यनाथ ने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए वह सब कुछ किया है जो एक ‘धम्म’ करता है।
गर्मी के मौसम में मध्य और उत्तर-पश्चिमी भारत में गर्मी का दौर शुरू होना कोई नयी बात नहीं है। मगर मार्च के बीच पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार हो जाना जरूर नयी बात लगती है। कुछ वक्त की राहत के बाद तापमान एक बार फिर बढ़ने वाला है।
इस साल फरवरी में शुरू हुए यूक्रेन (Ukraine) और रूस (Russia) के बीच युद्ध के फैलने और रूस पर वैश्विक प्रतिबंधों के बाद से, तेल की कीमतें (Oil Price) नियंत्रण से बाहर हो गई हैं, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड उच्च वृद्धि हुई है।
इस योजना की घोषणा करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि जिनेवा स्थित विश्व मौसम विज्ञान संगठन के सहयोग से इस परियोजना का क्रियान्वयन होगा और इसका उद्देश्य होगा समृद्ध देशों द्वारा प्रयोग की जा रही ऐसी प्रणालियों को विकासशील देशों के लिए उपलब्ध कराना।
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा आयोजित नेट-ज़ीरो बैंकिंग एलायंस (Net-Zero Banking Alliance) में 40 देशों के बैंकों को किया गया सदस्य के रूप में सूचीबद्ध, मगर सूची में एक भी भारतीय बैंक (Indian Bank) नहीं है।
अगर किसान जंगलों के बाहर वृक्षारोपण की प्रथा को बढ़ावा दें तो उन्हें सात प्रकार के मौद्रिक और तीन प्रकार...
अध्ययन से पता चला है कि 2019 में 83 माइक्रोग्राम / क्यूबिक मीटर (मिलीग्राम / घन मीटर) की औसत वार्षिक जनसंख्या-भारित पीएम 2.5 के साथ, भारत में पीएम 2.5 को 9,79,700 मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
