तर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2023 नामक एक रिपोर्ट जारी की है जो दर्शाती है कि सौर पैनल, पवन ऊर्जा, इलेक्ट्रिक कार और हीट पंप जैसी स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ अधिक लोकप्रिय हो रही हैं। ये प्रौद्योगिकियां हमारे कारखानों, वाहनों, घरेलू उपकरणों और हीटिंग सिस्टम जैसी चीजों को बिजली देने के तरीकों को बदल रही हैं।
आप सोचेंगे तो आपको समझ आएगा कि जलवायु परिवर्तन सिर्फ मौसम को ही नहीं बदलता; यह इन दिव्याँगजनों के मौलिक मानवाधिकारों तक को प्रभावित कर सकता है।
ग्लोबल कोल माइन ट्रैकर (Global Coal Mine Tracker) के डेटा से हमें दुनिया में 4300 सक्रिय और प्रस्तावित कोयला खदानों तथा परियोजनाओं में व्याप्त रोजगार के अवसरों के बारे में अपनी तरह का पहला जायजा मिलता है। यह खदानें दुनिया में होने वाले कुल कोयला उत्पादन में 90% से ज्यादा का योगदान करती हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की नमी की कमी से मानसून के दौरान भूमि और वायुमंडल के बीच कपलिंग प्रभावित होगी, जिससे मानसूनी वर्षा के पैटर्न में बदलाव आएगा।
एक नई रिपोर्ट से पता चलता है कि जहां एक ओर भारत और नेपाल में दुनिया भर में वायु प्रदूषण (Air Pollution) के सबसे खराब प्रदूषण से जूझ रहे हैं, वहीं इन देशों की इस समस्या से निपटने में मदद करने के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से बेहद कम आर्थिक सहयोग मिलता है।
एक ताजा अध्ययन के मुताबिक भारत अगर अपने रिन्यूबल एनेर्जी सम्बन्धी राष्ट्रीय लक्ष्यों को अगले 10 सालों में हासिल करता है तो बिजली उत्पादन में होने वाले कुल विकास का दो-तिहाई हिस्सा सौर और पवन ऊर्जा से आयेगा।
वार्षिक पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के वर्ष 2022 में 78 गीगावॉट से वर्ष 2027 में दोगुना होकर 155 गीगावॉट हो जाने की संभावना है। इससे अगले मात्र पांच वर्षों के दौरान वैश्विक स्तर पर कुल पवन ऊर्जा क्षमता बढ़कर 1500 गीगावॉट से ज्यादा हो जाएगी।
इस नए शोध की मानें तो जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और भीषण गर्मी आपके बच्चे का बुढ़ापा खराब कर सकती है।
साल 2021 में भविष्यवाणी की गई थी कि यह झील ओवरफ्लो हो जाएगी और बांध को प्रभावित करेगी। ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारण ग्लेशियर पिघलने (melting glaciers) के कारण ग्लेशियर झीलों की संख्या में वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में जनवरी से जून 2023 तक, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में, 78 देशों में बिजली उत्पादन डेटा का विश्लेषण किया गया है।
वायु प्रदूषण (Air Pollution) के मामले में देश के दस सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहरों की लिस्ट पर नज़र डालें तो लगता है दिल्ली की सर्दी उतनी घातक नहीं जितना दिल्ली का धुआँ है।
कई तरह के उत्तर इस प्रश्न के सामने आते हैं। कोई इसे 84 के दंगों के दोषियों की सजा से जोड़ते हैं। कोई इसे पंजाब की सिख धर्म की राजनीति से जोड़ते हैं। यह भी देखा जाता है सिख नेता और आम सिख जनता अलग तरह से इस खालिस्तानी विचारधारा का विरोध करते हैं। परन्तु यह खलिस्तानी कुविचार पूरी तरह से खत्म कैसे होगा, ये एक यज्ञ प्रश्न है?











