एक तो ब्रजरज का स्वाद, दूजा श्री राधा जी के हाथ का स्पर्श लड्डू। अमृत को फीका करे, ऐसा स्वाद लड्डू का।
भगवान श्री कृष्ण अजन्मा होकर भी पृथ्वी पर जन्म लेते हैं ,मृत्युंजय होने पर भी मृत्यु का वरण करते हैं और सर्वशक्तिमान होने पर भी उनका जन्म कारागार में होता है।भगवान श्री कृष्ण कहते हैं जब जब इस पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है ,विनाश का कार्य होता है और अधर्म बढ़ता है तब -तब मैं इस धरती पर आता हूं और अवतार लेता हूं।

