भारत के तीन सबसे बड़े केंद्रीय राज्य के स्वामित्व वाले उद्यम या पीएसयू- कोल इंडिया लिमिटेड (CIL), NTPC, और भारतीय रेलवे (Indian Railway)- मिल कर स्वच्छ ऊर्जा बाजार का एक बड़ा हासिल कर सकते हैं और साथ ही देश को अपने जलवायु लक्ष्यों तक पहुंचने में भी मदद कर सकते हैं।
आज का दिन ख़ास है। आज, सितंबर सात, को हर साल साफ हवा और नीले आसमान को समर्पित अंतर्राष्ट्रीय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। मगर इस साल साफ हवा और नीले आसमान को मिलेंगे बोल और धुन।
Climate Change: दुनिया के हर कोने में न सिर्फ़ जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को महसूस किया जा रहा...
भारत में हरित निवेश प्रवाह को ट्रैक करने के अपने तरह के एक पहले प्रयास को प्रस्तुत करती एक ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो फिलहाल देश में इस निवेश के प्रवाह की दशा और दिशा चिंताजनक है।
दुनिया के स्टार्टअप इकोसिस्टम (Startups Ecosystem) या समुदाय के आकार की बात करें तो भारत, अमेरिका और चीन के बाद...
फिलहाल प्रदूषण को लेकर जो भी नीतिगत निर्णय और कार्य किये जा रहे हैं, वे सभी सर्दियों के कुछ महीनों को ध्यान में रखकर ही हो रहे हैं। हालांकि सच्चाई यह है कि हम साल के ज्यादातर महीनों में वायु प्रदूषण के उच्च स्तरों की जद में होते हैं जिनका मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि वायु प्रदूषण से निपटान के लिए नीतीयां सिर्फ सर्दियों को नहीं बल्कि गर्मियों के महीनों को भी ध्यान में रख कर बनाई जाएँ।
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सस्टेनेबल मोबिलिटी नेटवर्क (sustainable mobility network) और सीएमएसआर कंसल्टेंट्स (CMSR Consultants) के एक ताजा सर्वे से जाहिर हुआ है कि उपभोक्ता वायु प्रदूषण (Air Pollution) और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने के लिए ई-कॉमर्स तथा डिलीवरी कंपनियों द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाते हुए देखना चाहते हैं।
यह एक ज्ञात तथ्य है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून में कई परिवर्तन हुए हैं। राज्य द्वारा संचालित भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 2022 में 1902 के बाद से दूसरी सबसे बड़ी चरम घटनाएं देखी गई हैं। जबकि बाढ़ और सूखे की घटनाओं में वृद्धि हुई है, इस बात के और भी सबूत सामने आ रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग भारतीय मानसून को कैसे प्रभावित कर रही है।
भारत अब अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 2030 तक 45 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्रतिबद्ध
भारत, नाइजीरिया, फिलीपींस और अफ्रीका समेत 33 देशों के बच्चे एक साथ हीटवेव, बाढ़, चक्रवात, बीमारी, सूखा और वायु प्रदूषण जैसे जलवायु प्रभावों का सामना कर रहे हैं। मगर इस सब के बावजूद, भारत में, बच्चों को दी जाने वाली जानकारी उतनी नहीं जितनी संभवतः आवश्यक है। और मानो इतना काफ़ी न हो, एनसीईआरटी (NCERT) ने हाल ही में इस संदर्भ में अपने स्कूल पाठ्यक्रम में जो बदलाव कर दिये हैं वो हैरान करने वाले हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) की जर्मनी (Germany) में हुए जी-7 (G7) सम्मेलन में मौजूदगी ने जहां एक ओर दुनिया के पटल पर भारत की प्रासंगिकता को एक बार फिर साबित किया, वहीं प्रधानमंत्री ने इस वैश्विक मंच का भरपूर फायदा उठाते हुए दुनिया को न सिर्फ़ शांति का संदेश दिया बल्कि यह भी साफ़ किया कि जलवायु गुणवत्ता (climate quality) के प्रति भारत का निश्चय उसके प्रदर्शन से साफ़ झलकता है और दुनिया को उससे सीखना चाहिए।
