मिथिला कला बिहार के मिथलांचल क्षेत्र की लोक कला है और 'रामायण' तथा 'महाभारत' में इसका उल्लेख मिलता है। इसकी उत्पत्ति 'कोहबर' (Kohbar) से हुई है। कोहबर एक ऐसे कमरे को कहा जाता है, जहां मैथली शादी के दौरान रस्में और रीति-रिवाज किये जाते हैं और उस कमरे की दीवारों पर देवी-देवताओं और अन्य शुभ प्रतीकों की छवियों को चित्रित किया जाता हैं।
