Kailash Mansarovar Yatra 2026: The Kailash Mansarovar Yatra has commenced from Tanakpur, Uttarakhand. Chief Minister Pushkar Singh Dhami flagged off...
हरिद्वार की पावन धरती ने एक बार फिर आध्यात्मिक इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में अपना नाम दर्ज करा दिया। गंगा...
माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से एक चेतन पुरुष की रचना की, जो सभी गुणों से संपन्न, दोषों से रहित, सुंदर अंग वाला, अद्भुत शोभायमान, महाबली और पराक्रमी था। उन्होंने अपने इस पुत्र को विनायक का नाम दिया। यही विनायक मस्तक कटने के बाद गणेश के नाम से जाने गए।
ये कहानी भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के नरसिंह अवतार (Narsingh Avtaar) से जुड़ी हुई है। प्रह्लाद की रक्षा के लिए श्रीहरि ने नरसिंह अवतार धारण करके हिरण्यकशिपु का वध अपने पंजे से कर दिया। लेकिन भक्त पर हुए अत्याचार से नाराज नरसिंह पूरी सृष्टि के विनाश के लिए उतारु हो गए।
श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर, विश्व भर में भगवान शिव का सबसे बड़ा मंदिर है। लगभग 24 एकड़ क्षेत्रफल में अपने विस्तार के कारण यह भारत का आठवाँ सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है।
शेषनाग की हुंकार से आज भी खौलता है यहाँ का पानी
Kailash Mansarovar Yatra 2026: कैलाश मानसरोवर यात्रा का शुभारंभ उत्तराखंड के टनकपुर से हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी...
भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा करने का सबसे उत्तम महीना होता है सावन (Sawan) लेकिन क्या जानते हैं कि सावन के महीने का इतना महत्व क्यों है और भगवान शिव को यह महीना क्यों प्रिय है? आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यताओं के बारे में।
भगवान शिव (Lord Shiva) के मस्तक पर गंगा के विराजमान होने की घटना का संबंध राजा भगीरथ से माना जाता है। कथा है कि भगीरथ ने अपने पूर्वज सगर के पुत्रों को मुक्ति दिलाने के लिए गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर उतारा था। लेकिन इस कथा के पीछे कई कथाएं हैं जिनसे भगीरथ का प्रयास सफल हुआ।
भगवान शिव (Lord Shiva) नटराज के रूप में संगीत कला के सर्जक व संरक्षक माने जाते हैं। डमरु (Damru) उनका विशेष वाद्ययंत्र है। 'डमरु' शब्द सुनते ही जो पहली तस्वीर आंखों के सामने आती है, वह है डमरु बजा कर नृत्य करते हुए भगवान शिव की।
बहुत कम लोग भगवान शिव भगवान शिव (Lord Shiva) के एक ऐसे अवतार के बारे में जानते होंगे जिन्होंने शनिदेव (Shanidev) पर प्रहार किया था। उसकी के कारण शनिदेव की गति मंद हो गई।
हर किसी को मालूम है कि गणेश जी (Ganesh ji) को मोदक और मिठाई कितनी पसंद है। शायद इसलिए वो किसी के भी निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं और मन भर कर मोदक और मिठाई खाते हैं।










