देश भर में गुरुपूर्णिमा (Gurupurnima) के दिन गुरुदेव की पूजा के साथ महर्षि व्यास की पूजा भी की जाती है। महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु के कालावतार माने गए हैं।
भगवान विष्णु (Lord Vishnu) सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालनकर्ता है। हिन्दू पुराणों में विष्णु जी को परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप माना गया है।
हिंदू पौराणिक कथाओं में, भगवान राम (Lord Rama) को भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का अवतार माना जाता है और वे अपने विभिन्न कौशल और उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं।
सूर्यदेव भगवान् विष्णु को गुरु मानकर उनके उत्तर भाग में आज भी स्थित हैं इसलिए वे केशवादित्य के नाम से प्रसिद्ध हैं। वे काशी में अपने भक्त के अज्ञानमय अंधकार को दूर करते हैं और उनसे प्रसन्न होकर उन्हें मनोवांछित सिद्धि देते हैं।
आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) व्रत आज 3 मार्च को है। होली (Holi) से पहले आमलकी एकादशी का विशेष महत्व है। क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा के साथ शंकर-पार्वती के साथ होली खेलने की परंपरा है, इसलिए इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
पद्मनाभस्वामी मंदिर (Padmanabhaswamy Temple) भारत के केरल (Kerala) राज्य के तिरुअनन्तपुरम (Thiruvananthapuram) में स्थित भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का मंदिर भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में से एक ऐतिहासिक मंदिर है।
एक बार देवर्षि नारद विष्णु भगवान (Lord Vishnu) से मिलने गए। भगवान ने उनका बहुत सम्मान किया। लेकिन जब नारद जी वापिस गए, तो विष्णुजी ने कहा- हे लक्ष्मी जिस स्थान पर नारद जी बैठे थे, उस स्थान को गाय के गोबर से लीप दो।
ये कहानी भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के नरसिंह अवतार (Narsingh Avtaar) से जुड़ी हुई है। प्रह्लाद की रक्षा के लिए श्रीहरि ने नरसिंह अवतार धारण करके हिरण्यकशिपु का वध अपने पंजे से कर दिया। लेकिन भक्त पर हुए अत्याचार से नाराज नरसिंह पूरी सृष्टि के विनाश के लिए उतारु हो गए।
भगवान राम और रावण के बीच युद्ध की कहानी को भी नवरात्रि से जोड़कर देखी जाती है। कहते हैं कि जिस वक्त श्री राम सीता को रावण से छुड़ाने के लिए युद्ध लड़ रहे थे। उस समय रावण पर विजय पाने के लिए भगवान श्री राम ने देवी दुर्गा का अनुष्ठान किया था, जो पूरे 9 दिनों तक चला था।
एक बार भगवान कृष्ण (Lord Krishna) के मन में आया कि आज गोपियों को अपना ऐश्वर्य दिखाना चाहिये। ये सोचकर जब भगवान निकुंज में बैठे थे, और गोपियाँ उनसे मिलने आ रही थी। तब भगवान कृष्ण विष्णु (Lord Vishnu) के रूप चार भुजाएँ प्रकट कर के बैठ गए। जिनके चारो हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म था।
भगवान शिव (Lord Shiva) के जन्म के विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को स्वयंभू माना गया है। शिव के जन्म की कहानी हर कोई जानना चाहता है।









