नई दिल्लीः भारतीय फार्मा प्रमुख Zydus Cadila ने दावा किया है कि यदि उनकी वैक्सीन ZyCoV-D को रेगूलेटर्स द्वारा अनुमति प्रदान की गई, तो यह दुनिया की पहली DNA वैक्सीन होगी। टीका प्राप्तकताZओं में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रेरित करने के लिए कोविड-19 वायरस के आनुवंशिक कोड के एक हिस्से का उपयोग करता है।
इसके लिए भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) से आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मांगी है। बच्चों के लिए सुरक्षित बताई जा रही इस कोरोना वैक्सीन में बहुत सी विशेषताएं हैं। यह पहली पालस्मिड DNA वैक्सीन है। इसके साथ-साथ इसे बिना सुई की मदद से फामाZजेट तकनीक से लगाया जाएगा, जिससे साइड इफेक्ट के खतरे कम होंगे।
बता दें कि जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन ZyCoV-D का तीसरे चरण का ट्रायल हो चुका है। इसमें 28 हजार प्रतिभागियों से हिस्सा लिया था। भारत में किसी वैक्सीन का यह अब तक का सबसे बड़ा ट्रायल है, इसके नतीजे भी संतोषजनक बताए गए हैं। दूसरी कोरोना लहर के दौरान ही देश की 50 क्लीनिकल साइट्स पर इसका ट्रायल हुआ था। इसे डेल्टा वैरिएंट पर भी असरदार बताया जाता है।
फाइजर और मॉडनZ जैसे अन्य टीके एमआरएनए तकनीक पर आधारित हैं, जबकि कोविशील्ड वायरल वेक्टर तकनीक का उपयोग करता है।
इस बीच जायडस कैडिला के एमडी शरविल पटेल ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य दिसंबर 2021 तक 5 करोड़ डोज का उत्पादन करना है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
