US Attack के बाद ईरान का जवाबी वार, बहरीन-कुवैत में अमेरिकी ठिकाने निशाने पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका “सैन्य रूप से काम पूरा” कर सकता है, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने रविवार को दावा किया कि उसने रातभर बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।

IRGC ने यह भी चेतावनी दी कि यदि वाशिंगटन ने अपने सैन्य अभियान जारी रखे, तो अमेरिका के साथ चल रही बातचीत “पूरी तरह से समाप्त” हो सकती है।

सरकारी अखबार ‘ईरान’ में प्रकाशित बयान में तेहरान ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते के भविष्य को लेकर अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी दी। इस समझौते के तहत दोनों देशों को संघर्ष का स्थायी समाधान तलाशने के लिए 60 दिनों के भीतर बातचीत करनी थी।

AP की रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने दावा किया कि उसके रातभर के हमलों में बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (US Fifth Fleet) के मुख्यालय और कुवैत स्थित अल-असद एयर बेस को निशाना बनाया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

गार्ड ने कहा, “दुश्मन को पता होना चाहिए कि युद्धविराम का उल्लंघन… चल रही प्रक्रियाओं को पूरी तरह से रोक देगा।”

कुवैत की सेना ने कहा कि उसके वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरान से आ रहे ड्रोन और मिसाइलों को रोक दिया, और कहा कि किसी भी नुकसान की तत्काल कोई जानकारी नहीं है। इस देश में अमेरिकी सेना का एक बड़ा बेस है।

बहरीन के विदेश मंत्रालय ने इसे “खतरनाक वृद्धि” बताते हुए इसकी निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि तेहरान जो कर रहा है, वह कोई क्षणिक हरकत या अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि राज्य की संप्रभुता और उसके नागरिकों व निवासियों की सुरक्षा के खिलाफ बार-बार की जा रही आक्रामकता का एक जानबूझकर अपनाया गया तरीका और व्यवस्थित पैटर्न है।

बहरीन, जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है, संघर्ष के दौरान अपने नौसैनिक अड्डे पर बार-बार हमले झेल चुका है।

इससे पहले, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान पर एक और दौर के हमले किए हैं। यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक टैंकर पर हमले के कुछ ही घंटों बाद की गई। यह दुनिया का सबसे व्यस्त तेल शिपिंग मार्ग है, जिसे ईरान ने संघर्ष के दौरान काफी हद तक बंद रखा था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पहले कहा था कि शनिवार को पनामा के झंडे वाले एक टैंकर को ईरानी ड्रोन द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद उसकी सेना ने एक और दौर के हमले किए।

एक बयान में सेंट्रल कमांड ने कहा, “ईरान को युद्धविराम समझौते का सम्मान करने का मौका दिया गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।” साथ ही कहा कि ये हमले “व्यावसायिक जहाजों के खिलाफ ईरान की लगातार आक्रामकता का सीधा जवाब” थे और इनमें ईरान के सैन्य निगरानी बुनियादी ढांचे, संचार प्रणालियों, वायु रक्षा स्थलों, ड्रोन भंडारण सुविधाओं और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया गया।

शनिवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हो सकता है कि एक समय ऐसा आए जब हम समझदारी से काम न ले पाएं और हमें उस काम को मिलिट्री के ज़रिए पूरा करना पड़े जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था। अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा!”

इस बीच, ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने बताया कि दक्षिणी ईरान के सिरिक में धमाकों की आवाज़ सुनी गई, लेकिन ज़्यादा जानकारी नहीं दी। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा, “सिरिक पर अमेरिका के अंधेधुंध हमलों से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर हमारा दबदबा खत्म नहीं होगा। लेकिन नियम तोड़ने वालों पर हमारे हमले बाकी जहाज़ों को साफ़ रास्ते की याद दिला देंगे।”

अमेरिका-ईरान के बीच 14-सूत्रीय अंतरिम समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच 14-सूत्रीय अंतरिम समझौते का मकसद उस लड़ाई को रोकना था जो 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा मिलिट्री ऑपरेशन शुरू करने के बाद छिड़ी थी। इसका मकसद स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से शिपिंग को फिर से शुरू करना भी था, जबकि दोनों पक्ष ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम समेत लंबे समय के मुद्दों पर बातचीत कर रहे थे।

पिछले हफ़्ते स्विट्ज़रलैंड में बातचीत का एक दौर हुआ, जिसकी अगुवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ़ ने की। बैठक के बाद, वॉशिंगटन ने तेहरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी। हालांकि, उसके बाद से झड़पें फिर शुरू हो गई हैं, और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और मिलिट्री कार्रवाई बढ़ा रहे हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ)