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Paush Purnima 2026: पौष पूर्णिमा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Paush Purnima 2026: पौष पूर्णिमा हिंदू महीने पौष (दिसंबर-जनवरी) में पूर्णिमा का दिन होता है। इसे पवित्र स्नान, दान और पवित्र माघ महीने की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन से प्रयागराज में तीन नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम की पावन रेती पर दुनिया के सबसे बड़े वार्षिक धार्मिक और आध्यात्मिक समागम माघ मेला की शुरुआत हो रही है। 44 दिनों तक चलने वाले इस आस्था के पर्व का पहला पड़ाव पौष पूर्णिमा है।

यह विक्रम संवत के दसवें मास पौष के शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि है। इस दिन को देवी शाकम्भरी की याद मे भी मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन देवों की करूण पुकार को सुन आदिशक्ति जगदम्बा शाकुम्भरी के रूप मे शिवालिक हिमालय मे प्रकट हुई थी।

तिथि और समय (2026)
पौष पूर्णिमा इस दिन है: शनिवार, 3 जनवरी 2026 (मुख्य दिन)।
पूर्णिमा तिथि शुरू होती है: 2 जनवरी 2026 को शाम ~6:53 बजे।
पूर्णिमा तिथि समाप्त होती है: 3 जनवरी 2026 को दोपहर ~3:32 बजे।
पूर्णिमा के दिन चंद्रमा उदय: 3 जनवरी को शाम ~5:28 बजे।

हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, उपवास और मुख्य अनुष्ठान 3 जनवरी को सूर्योदय आधारित उदय तिथि के अनुसार किए जाते हैं।

शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त (पवित्र स्नान और दान के लिए सबसे अच्छा समय): सुबह लगभग 5:25 AM – 6:20 AM (3 जनवरी) पवित्र स्नान और दान के लिए बहुत शुभ माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त (पूजा/दान के लिए अच्छा): लगभग 12:05 PM – 12:46 PM (3 जनवरी)।

पौष पूर्णिमा का महत्व
पौष पूर्णिमा हिंदू कैलेंडर में एक बहुत ही पूजनीय पूर्णिमा का दिन है जिसका गहरा आध्यात्मिक महत्व है:

साल की पहली पूर्णिमा
यह हिंदू चंद्र चक्र के अनुसार नए साल की पहली पूर्णिमा का प्रतीक है, जो इसे आध्यात्मिक नवीनीकरण के लिए विशेष रूप से शुभ बनाता है।

माघ महीने की शुरुआत और तीर्थयात्रा गतिविधियाँ
यह पवित्र माघ महीने की शुरुआत का संकेत देता है, जो एक आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण अवधि है। प्रयागराज (इलाहाबाद) में माघ मेले जैसे प्रमुख तीर्थयात्राएं और पवित्र सभाएं इस दिन शुरू होती हैं, जिसमें लाखों भक्त त्रिवेणी संगम पर पौष पूर्णिमा स्नान करते हैं। पवित्र स्नान और शुद्धि गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में पवित्र डुबकी लगाने से मन, शरीर और आत्मा शुद्ध होती है, जिससे पिछले पापों और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है।

दान और पवित्र कार्य
इस दिन दान, पूजा, उपवास और भक्ति करने से शांति, समृद्धि, आध्यात्मिक विकास और कर्मों के बोझ से मुक्ति मिलती है।

देवताओं की पूजा
भक्त पारंपरिक रूप से भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और चंद्र देव (चंद्रमा देवता) की पूजा करते हैं, और कल्याण, धन और सद्भाव के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।

महत्वपूर्ण कुंभ/माघ मेले की गतिविधियों की शुरुआत
प्रयागराज में, लाखों भक्त स्नान और आध्यात्मिक सभाओं में भाग लेते हैं।

संक्षेप में, पौष पूर्णिमा 2026 3 जनवरी को मनाई जाएगी, जिसमें चंद्र तिथि 2 जनवरी की शाम से 3 जनवरी की दोपहर तक रहेगी, और इसे शुद्धि, भक्ति, दान और आध्यात्मिक जागृति के दिन के रूप में मनाया जाता है।