भगवान विष्णु के मोहिनी रूप को देखकर भगवान शिव काम-मोहित हो गए। जब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप का त्याग किया तो भगवान शिव का मन दुखी हो गया। उसी समय उनका शुक्र धरती पर स्खलित हो गया। उससे एक परम प्रतापी काले रंग का असुर पैदा हुआ।
कपूरथला स्थित पंच मंदिर (Panch Mandir) का निर्माण कपूरथला स्टेट के महाराजा फतेह सिंह ने 1831 में तैयार करवाया था। यह मंदिर 12 साल में तैयार हुआ था। यह मंदिर 200 साल पुराना और ऐतिहासिक है। यह भारत का दूसरा ऐसा मंदिर है, जहां सूर्य भगवान और राधा-कृष्ण के मंदिर में सुशोभित प्रतिमा पर हर सुबह सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं।
देश के अलग-अलग भागों में स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग (Jyotirlinga) में से सबसे खास है श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (Mahakaleshwar Jyotirlinga)। इन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग (Dwadash Jyotirlinga) में से एक कहा गया है। इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन, पूजन, आराधना से भक्तों के जन्म-जन्मांतर के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं। वे भगवान शिव की कृपा के पात्र बनते हैं। यह परम पवित्र ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है।
उल्टा स्वस्तिक बनाने से हर इच्छा पूरी होने फिर सीधा स्वस्तिक बनाते हैं भक्त, देश के सबसे धनी गणेश मंदिरों में होती है गिनती
‘श्री सुदर्शन-चक्र’ भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) जी का प्रमुख आयुध है, जिसके माहात्म्य की कथाएँ पुराणों में स्थान-स्थान पर दिखाई...
पूरी दुनिया में ताजनगरी के नाम से मशहूर आगरा (Agra) शहर में एक ऐसा दिव्य और चमत्कारी हनुमान मंदिर (Hanuman Mandir) है जो करीब 500 साल पुराना है। इस मंदिर को लंगड़े की चौकी के नाम से जाना जाता है। भगवान हनुमान का ये चमत्कारी मंदिर मुगलकालीन है। सिविल लाइंस में मौजूद इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि ये मंदिर अकबर के काल से ही मौजूद है।
जीवात्मा के पूर्वजन्मों कृत कर्म और संस्कार ही प्रारब्ध बनकर अगले जन्म में सुख-दुख के स्वरूप मे...
दुर्गा पूजा सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है, खासकर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, त्रिपुरा, बिहार और बांग्लादेश में, लेकिन पूरे भारत में भी मनाया जाता है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि एक विशाल सांस्कृतिक उत्सव भी है।
Ram Navami 2022: राम नवमी (Ram Navami) पर पुनर्वसु नक्षत्र में श्रीराम का जन्म हुआ था। श्रीराम (Shri Ram) के...
पूर्णागिरी मंदिर काली नदी के तट पर स्थित है और इसे पूनागिरी के नाम से भी जाना जाता है। इन सभी पीठों में यह भक्ति पीठ, मलकागिरी, कालिकागिरी और हिमलागिरी प्रमुख स्थान रखती है। पूर्णागिरी पर्वत के उच्चतम बिंदु से, काली नदी को नेपाल से होते हुए देखा जा सकता है।
शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima), जिसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, एक फसल उत्सव है जो हिंदू चंद्र माह अश्विन (आमतौर पर अक्टूबर में) की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
शकूराबाद अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनों ने वट-सावित्री पूजा में बड़े ही उत्साह के साथ भाग लिया। रघुनाथगंज सूर्य मंदिर...


