महाभारत में सैकड़ों पात्रों, स्थानों, घटनाओं तथा विचित्रताओं व विडंबनाओं का वर्णन है। प्रत्येक हिंदू के घर में महाभारत महाकाव्य होना चाहिए। महाभारत में कई रहस्य भरे हुए हैं। महाभारत युद्ध में 8 और 18 संख्या का बहुत महत्व है। आओ जानते हैं 8 और 18 अंक का महाभारत में क्या रहस्य है।
‘श्री सुदर्शन-चक्र’ भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) जी का प्रमुख आयुध है, जिसके माहात्म्य की कथाएँ पुराणों में स्थान-स्थान पर दिखाई...
यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के चार पवित्र स्थलों की तीर्थयात्रा, चार धाम यात्रा, भक्तों के लिए बहुत महत्व रखती है, जो 10 मई से शुरू होने वाली है। यात्रा का सारा विवरण जैसे हेलीकॉप्टर बुकिंग किरायाए हेल्पलाइन नम्बर आदि का विवरण यहां देखेंः
अनमोल कुमार जयपुर (Jaipur) के एक ऐसे प्रसिद्ध मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर आकर सब...
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का एक अनोखा मंदिर है जो अपने निर्माण काल से अधूरा है और कभी पूरा नहीं किया जा सका। इस मंदिर को जांजगीर विष्णु मंदिर (Janjgir Vishnu Temple) के नाम से जाना जाता है।
अग्रतश्चतुरो वेदा: पृष्ठत: सशरं धनु: । इदं ब्राह्मम् इदं क्षात्रं शापादपि शरादपि ॥ अर्थ : चारों वेद कंठस्थ कर ब्राह्मतेज...
कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami), जिसे कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, अष्टमी रोहिणी और श्रीकृष्ण जयंती भी कहा जाता है। इस साल जन्माष्टमी सोमवार, 26 अगस्त को मनाई जाएगी।
जिस प्रकार महादेव की महिमा अपरम्पार है उसी प्रकार उनके रूप-स्वरुप की भी महिमा अपरम्पार है। महादेव (Mahadev)अपने शरीर पर...
एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा-पिताजी आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते। मेरी माता गौरी...
इस मंदिर को पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath Temple) के नाम से भी जाना जाता है चूंकि रुद्रनाथ मंदिर के अन्य मंदिरों से अलग है, इसलिए दूर दूर से लोग इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं। जहां शिव जी के लिंग रूप की पूजा होती है वहीं इस मंदिर में केवल उनके मुख की पूजा होती है।
हिंदुओं की आस्था के केंद्र यमुनोत्री धाम स्थान यमुनोत्तरी हिमनद से 5 मील नीचे दो वेगवती जलधाराओं के मध्य एक कठोर शैल पर है। बांदरपूंछ के पश्चिमी छोर के एक संकरे स्थान पर पवित्र यमुनाजी का मंदिर है।
झालरापाटन का यह विशाल सूर्य मंदिर, पद्मनाथजी मंदिर, बड़ा मंदिर, सात सहेलियों का मंदिर आदि अनेक नामों से प्रसिद्ध है। मंदिर का निर्माण खजुराहो एवं कोणार्क शैली में हुआ है। यह शैली ईसा की दसवीं से तेरहवीं सदी के बीच विकसित हुई थी।



