अनमोल कुमार जयपुर (Jaipur) के एक ऐसे प्रसिद्ध मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर आकर सब...
प्रथम पूज्य देव भगवान श्री गणेश को विघ्नविनाशक माना जाता है। सप्ताह में इनका दिन बुधवार माना गया है। वहीं...
विनायक, गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। गणेश जी (Ganesh ji) जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है, वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्घिविनायक मंदिर कहलाते हैं। मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं।
फल्गु नदी (Falgu River) के अंत के रमणीय तट पर श्री विष्णु भगवान (Vishnu Bhagwan) और माता मंगलागौरी जी (Mata...
शनिदेव (Shanidev) की पूजा को लेकर कई तरह के सवाल लोगों के मन में उठते रहते हैं। इन्हीं में से...
दस देशों में स्थापित गणेशी प्रतिमाओं की प्रतिकृति को यहां दर्शाया गया
अनमोल कुमार एक बार बाल गणेश अपने मित्र मुनि पुत्रों के साथ खेल रहे थे। खेलते-खेलते उन्हें भूख लगने लगी।...
श्री मयूरेश्वर मंदिर (Shri Mayureshwar Temple) पुणे (Pune) से 80 किलोमीटर दूर स्थित है। यह मोरेगांव गणेशजी (Ganeshji) की पूजा का महत्वपूर्ण केंद्र है। मयूरेश्वर मंदिर (Mayureshwar Mandir) के चारों कोनों में मीनारें हैं और लंबे पत्थरों की दीवारें हैं। यहां चार द्वार हैं। ये चारों दरवाजे चारों युग, सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग के प्रतीक हैं।
ऋषि कश्यप की कई पत्नियां थीं, जिनमें से दो वनिता और कद्रू थी। ये दोनों ही बहनें थी, जो एक दूसरे से ईर्ष्या रखती थी। दोनों के पुत्र नहीं थे तो पति कश्यप ने दोनों को पुत्र के लिए एक वरदान दे दिया। वनिता ने दो बलशाली पुत्र मांगे जबकि कद्रू ने हजार सर्प पुत्र रूप में मांगे जो कि अंडे के रूप में जन्म लेने वाले थे। सर्प होने के कारण कद्रू के हजार बेटे अंडे से उत्पन्न हुए और अपनी मां के कहे अनुसार काम करने लगे।
एक बार देवर्षि नारद विष्णु भगवान (Lord Vishnu) से मिलने गए। भगवान ने उनका बहुत सम्मान किया। लेकिन जब नारद जी वापिस गए, तो विष्णुजी ने कहा- हे लक्ष्मी जिस स्थान पर नारद जी बैठे थे, उस स्थान को गाय के गोबर से लीप दो।



