मां तारा देवी और मंदिर की स्थापना कब और किसने किया किसी को कोई जानकारी नही है। गाव के बुजुर्ग भी इस संबंध में कुछ नही जानते। कच्ची मिट्टी और गदहिया ईट से निर्मित मंदिर के गर्भ गृह की दीवार 4-5 फीट मोटी है। गर्भ गृह की सुन्दर #नक्काशिया मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
पैगंबर मोहम्मद का जब जन्म भी नहीं हुआ था, तब से अमरनाथ गुफा में हो रही है पूजा-अर्चना! इसलिए इस...
हनुमान (हनुमान्, आंजनेय और मारुति) परमेश्वर की भक्ति की सबसे लोकप्रिय अवधारणाओं और भारतीय महाकाव्य रामायण में सबसे महत्वपूर्ण पात्रों...
महाभारत में सैकड़ों पात्रों, स्थानों, घटनाओं तथा विचित्रताओं व विडंबनाओं का वर्णन है। प्रत्येक हिंदू के घर में महाभारत महाकाव्य होना चाहिए। महाभारत में कई रहस्य भरे हुए हैं। महाभारत युद्ध में 8 और 18 संख्या का बहुत महत्व है। आओ जानते हैं 8 और 18 अंक का महाभारत में क्या रहस्य है।
भगवान शिव (Lord Shiva) को स्वयंभू कहा जाता है। जिसका अर्थ है कि वह अजन्मे हैं। शिव न आदि हैं...
जीवात्मा के पूर्वजन्मों कृत कर्म और संस्कार ही प्रारब्ध बनकर अगले जन्म में सुख-दुख के स्वरूप मे...
यह देश में एकमात्र ऐसा स्थान है जो दुर्गा सप्तशती के वर्णन से मेल खाता है। कल्याण की धार्मिक किताब के शक्ति अंक ने यह भी पुष्टि की है कि यह विशेष स्थान एक शक्तिपीठ है। हरिद्वार (Haridwar) में कनखल (Kankhal) में एक नदी के साथ लगे दुर्गा मंदिर को भी, इन दो लोगों की पूजा स्थल माना जाता है। हालांकि, दुर्गा की मूर्ति वहाँ मिट्टी से बनी नहीं है हालांकि दक्षिणा प्रजापति का मंदिर कनखल में स्थित है।
श्रवण माह में देवाधिदेव महादेव शिव आराधना का बड़ा महत्व है। इस दौरान जगह-जगह कांवड़ियों की लम्बी कतारें बम बम भोले के जयकारे लगाते हुए भोले बाबा को जल चढ़ाते है। आखिर, श्रद्धा से जुड़ी इस परंपरा की शुरुआत कब और किसने की? इस पर अलग-अलग मत है। यहां जानें कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) किसने शुरू की।
वेदों के साथ ऋषि-मुनि भी करते थे सूर्य की आराधना
महाशिवरात्रि के दिन शिवतत्त्व नित्य की तुलना में 1000 गुना अधिक कार्यरत रहता है। शिवतत्त्व का अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने हेतु महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की भावपूर्ण रीति से पूजा-अर्चना करने के साथ ‘ॐ नमः शिवाय’ यह नामजप अधिकाधिक करना चाहिए।’
भगवान सूर्य (Bhagwan Surya) जिस सात घोड़े (Seven horses) वाले रथ पर सवार रहते हैं उसके संबंध में धार्मिक ग्रंथों...
जीवात्मा के पूर्वजन्मों कृत कर्म और संस्कार ही प्रारब्ध बनकर अगले जन्म में सुख-दुख के स्वरूप मे...
