पुराणों में माता लक्ष्मी (Mata Laxmi) की उत्पत्ति के बारे में विरोधाभास पाया जाता है। एक कथा के अनुसार माता लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान निकले रत्नों के साथ हुई थी, लेकिन दूसरी कथा के अनुसार वे भृगु ऋषि की बेटी हैं।
गणपति (Ganpati) की महिमा को सभी जानते हैं और यह भी जानते हैं कि वे माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं। लेकिन बहुत कम लोग हैं जो इससे आगे गणेश के परिवार के बारे में जानते हैं, उनकी पत्नी और बच्चों के बारे में जानते हैं।
बिहार की राजधानी पटना को प्राचीन समय में मगध की राजधानी के रूप में जाना जाता था, लेकिन साल 1912 में इस बिहार की स्थापना के बाद पटना शहर को राजधानी के रूप में जाना जाने लगा।
सूर्य देव को जल चढाने का उद्देश्य केवल सूर्य देव को प्रसन्न करना या यश की प्राप्ति करना नहीं है। इससे हमारे स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) के बारे में कहा जाता है कि पास स्थित समुंदर की लहरें कभी भी मंदिर के प्रांगण में आ जाती थीं, जिससे वहां लगभग हर वक़्त स्थिति आपदा वाली रहती थी।
भक्त वत्सल्य भगवान श्री गणेश के बारे में कई पौराणिक कथाएं वर्णित हैं। इन्हीं में से एक है भगवान जगन्नाथ की कथा। जिसमें प्रभु जगन्नाथ ने श्री गणेश जी का रूप धारण कर भक्त को दर्शन दिए थे।
कौरवों से जुए में राज-पाट हारने के बाद पाण्डवों को 12 साल का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास हुआ था। 12 साल का समय समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था और अज्ञातवास का आरंभ होना था।
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर (Shri Jagannath Temple) में मिलने वाले प्रसाद को क्यों कहा जाता है महाप्रसाद (Mahaprashad), जानें इसके पीछे का रहस्य।
छत्तीसगढ़ में एक ऐसा शनि मंदिर हैं, जहां शनि देव अपनी पत्नी के साथ विराजित है। एक तरफ जहां शनि मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है, वहीं यह एक अनोखा मंदिर है जहां पति-पत्नी साथ पूजा करते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ज्योतिर्लिंग (Jyotirlinga) मतलब वह स्थान जहां भगवान शिव ने स्वयं लिंगम स्थापित किए थे। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन नगर में स्थित है।
विश्व के गिने-चुने पहाड़ों में बराबर पहाड़ी शामिल है जो खण्डित है, जड़ से चोटी तक पूरी तरह टुकड़ों में बँटा है। यहाँ भगवान शिव सिद्धेश्वरनाथ शिवलिंग (Siddheshwarnath Shivling) के रूप में विराजमान हैं।
इस साल देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) में बेहद ख़ास संयोग बन रहा है। इस दिन एक या दो नहीं, पूरे चार शुभ योग रहने वाले हैं। जानिए, इस साल देवशयनी एकादशी का व्रत कब रखा जायेगा और इस दिन कौन से विशेष योग बन रहे हैं?












