मोदी सरकार की मुश्किलें बढीं, छात्र आंदोलन के बीच किसानों का दिल्ली कूच

Delhi Farmers Protest 2026: मोदी सरकार के सामने चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। एक ओर विभिन्न मुद्दों को लेकर छात्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों ने भी प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। किसानों का कहना है कि इस समझौते से देश के कृषि और डेयरी क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, इथेनॉल नीति को लेकर भी सरकार पहले से ही विपक्ष और विभिन्न किसान संगठनों के सवालों का सामना कर रही है, जिससे राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है।

किसान महापंचायत
पंजाब, हरियाणा और कई अन्य राज्यों के हज़ारों किसान मंगलवार को दिल्ली के किसान घाट पर आयोजित ‘देश बचाओ मोर्चा’ की किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए राजधानी की ओर कूच कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील से देश के कृषि और डेयरी क्षेत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है, इसलिए वे इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

PTI के अनुसार, किसानों के दिल्ली मार्च को देखते हुए पंजाब-हरियाणा सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर पर कंक्रीट बैरिकेड लगाए हैं और बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की है, ताकि प्रदर्शनकारी दिल्ली की ओर आगे न बढ़ सकें।

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार शांतिपूर्ण ढंग से दिल्ली जा रहे किसानों को रोक रही है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे सरकार का “असली चेहरा” सामने आया है।

दिल्ली के किसान घाट पर होने वाली यह दिनभर की किसान महापंचायत भारत-अमेरिका ट्रेड डील के संभावित प्रभावों के साथ-साथ किसानों की अन्य लंबित मांगों पर भी केंद्रित रहेगी।

क्यों कर रहे हैं किसान विरोध?
PTI के मुताबिक, किसान संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते से टैरिफ कम करके और बाज़ार तक पहुँच आसान बनाकर सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों का भारत में ज़्यादा आयात हो सकता है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सोयाबीन, मक्का, कपास, सेब, बादाम, डेयरी उत्पादों और पोल्ट्री जैसे उत्पादों के सस्ते आयात से भारतीय किसानों के लिए – जिनमें से ज़्यादातर के पास छोटी ज़मीनें हैं – मुक़ाबला करना मुश्किल हो सकता है, जिससे खेती से होने वाली आय कम होगी और ग्रामीण आजीविका पर असर पड़ेगा।

उनका तर्क है कि अमेरिकी किसानों को ज़्यादा सरकारी सब्सिडी मिलती है और वे बहुत बड़े खेतों में खेती करते हैं, जिससे उन्हें भारतीय उत्पादकों के मुक़ाबले फ़ायदा मिलता है।

किसान नेताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि प्रस्तावित समझौते से कृषि के अलावा डेयरी, मछली पालन, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, निवेश, छोटे कारोबार और माइक्रो इंडस्ट्रीज़ जैसे सेक्टर भी प्रभावित हो सकते हैं।

क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारी माँग कर रहे हैं कि केंद्र सरकार प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करे और बातचीत से जुड़े सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक करे।

उन्होंने यह भी माँग की है कि किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले किसान संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ व्यापक बातचीत की जाए।

प्रस्तावित समझौते की घोषणा सबसे पहले फ़रवरी 2025 में जारी भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान में की गई थी, जिसमें दोनों देश 2025 की शरद ऋतु तक कई सेक्टर वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर बातचीत करने के लिए सहमत हुए थे।

(एजेंसी इनपुट के साथ)