राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: 3 नए ट्रस्टी कौन हैं? पहली महिला ट्रस्टी से लेकर पूर्व एयर मार्शल तक, जानें पूरी कहानी

राम मंदिर ट्रस्ट में हाल के घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े किए। चंदा चोरी के विवाद के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हुई। मामले में कार्रवाई भी हुई, लेकिन जांच और उसके नतीजे कितने प्रभावी रहे, यह सवाल अभी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है।

इसी बीच, ट्रस्ट ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों—महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और डॉ. निर्मला यादव—को शामिल किया गया है। इनमें डॉ. निर्मला यादव की नियुक्ति खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी बनी हैं।

इसके साथ ही एक और बड़ा फैसला लेते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त किया गया है। उनके जिम्मे मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, संचालन और वित्तीय जवाबदेही को और मजबूत करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

कुल मिलाकर, राम मंदिर ट्रस्ट में हुआ यह बदलाव सिर्फ नए चेहरों को शामिल करने तक सीमित नहीं है। यह ऐसे समय में हुआ है जब ट्रस्ट को मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक कामकाज के साथ-साथ पारदर्शिता, वित्तीय निगरानी और बेहतर प्रबंधन की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है।

राम मंदिर ट्रस्ट के नए चेहरे: कौन हैं 3 नए ट्रस्टी?

महेश भागचंदका
दिल्ली के रहने वाले 68 वर्षीय कारोबारी और समाजसेवी महेश भागचंदका को नया ट्रस्टी बनाया गया है। वे राम मंदिर से जुड़े विभिन्न धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रहे हैं और राम मंदिर के भूमि पूजन तथा प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रमुख यजमानों में शामिल थे। वे राम वन गमन यात्रा मार्ग के 292 तीर्थ स्थलों पर श्रीराम स्तंभों की स्थापना से भी जुड़े रहे हैं।

मदन मोहन पांडे
अयोध्या के 74 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडे को भी ट्रस्टी बनाया गया है। वे उत्तर प्रदेश के पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल रह चुके हैं। 1990 से 2019 के बीच उन्होंने रामलला विराजमान और महंत रामचंद्र परमहंस दास से जुड़े मामलों में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की थी।

डॉ. निर्मला यादव
66 वर्षीय शिक्षाविद डॉ. निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी बनी हैं। वे 19 वर्षों तक कॉलेज प्रिंसिपल रहीं और 15 वर्षों तक विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की सदस्य रहीं। उनकी नियुक्ति से ट्रस्ट में शिक्षा जगत और महिला प्रतिनिधित्व को जगह मिली है।

वहीं, स्वामी गोविंद देव गिरी को नया महासचिव बनाया गया है और महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है।

पहली बार CEO की नियुक्ति
ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, चयन प्रक्रिया में 5,585 आवेदन आए थे। मिश्रा भारतीय वायुसेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं और पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व कर चुके हैं।

पूरी कहानी क्या है?
राम मंदिर निर्माण के बाद ट्रस्ट की जिम्मेदारियां अब केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं हैं। मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक कामकाज, श्रद्धालुओं की व्यवस्था, दान और वित्तीय प्रबंधन को देखते हुए ट्रस्ट ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है।

यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब मंदिर के चढ़ावे/दान की गिनती और वित्तीय प्रबंधन को लेकर विवाद भी सामने आया है। ट्रस्ट ने दान की गिनती में तकनीक के इस्तेमाल और मानव हस्तक्षेप कम करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है।

यानी नई टीम में कारोबारी अनुभव, कानूनी विशेषज्ञता, शिक्षा क्षेत्र और सैन्य प्रशासन—चारों तरह की विशेषज्ञता दिखाई देती है। इसे राम मंदिर के अगले चरण के अधिक पेशेवर और व्यवस्थित प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

यह बदलाव मुख्यतः राम मंदिर के निर्माण के बाद बढ़ती प्रशासनिक जिम्मेदारियों और ट्रस्ट के कामकाज को ज्यादा व्यवस्थित व पेशेवर बनाने के लिए किया गया बताया गया है।

बदलाव के पीछे मुख्य रूप से 3 बड़े कारण बताए जा रहे हैं:

दान/चढ़ावे से जुड़ा विवाद और जांच
राम मंदिर के दान में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट पर पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने का दबाव बना। इसी संदर्भ में दान की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है।

मंदिर का बढ़ता संचालन और प्रशासन
अब ट्रस्ट का काम केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक व्यवस्था और भविष्य की योजनाओं के लिए एक पूर्णकालिक पेशेवर प्रबंधन ढांचा (full-time professional management structure) की जरूरत महसूस हुई। इसी वजह से पहली बार CEO का पद बनाया गया।

खाली पद और संगठनात्मक फेरबदल
कुछ पद रिक्त होने और नेतृत्व संरचना में बदलाव के बाद तीन नए ट्रस्टी शामिल किए गए। साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों—प्रशासन, कानून, शिक्षा और व्यवसाय—के अनुभव को ट्रस्ट से जोड़ा गया।

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव सिर्फ नए चेहरों की नियुक्ति नहीं है। दान विवाद के बाद पारदर्शिता, बढ़ते प्रशासनिक काम और मंदिर के प्रोफेशनल मैनेजमेंट की जरूरत ने ट्रस्ट को अपनी पूरी कार्यप्रणाली में बदलाव करने पर मजबूर किया। इसी कड़ी में पहली बार CEO की नियुक्ति, तीन नए ट्रस्टी और वित्तीय निगरानी को मजबूत करने के कदम उठाए गए हैं।