Analog Paneer: असली पनीर से कितना अलग है एनालॉग पनीर? कीमत, घर पर टेस्ट और बैन की पूरी कहानी

Analog Paneer: कई राज्यों में “पनीर” के नाम से बेचे जाने वाले एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री को लेकर कार्रवाई या पाबंदियां लगाई गई हैं। इसके पीछे मुख्य चिंताएं खाद्य सुरक्षा, उपभोक्ताओं की सेहत और ग्राहकों को सही जानकारी दिए बिना डेयरी पनीर के रूप में प्रोडक्ट बेचने से जुड़ी हैं।

महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक में एनालॉग पनीर के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं।

एनालॉग पनीर क्या होता है?
FSSAI के अनुसार, एनालॉग फूड ऐसा प्रोडक्ट है जिसमें दूध के कुछ या सभी घटकों को गैर-डेयरी स्रोतों से प्राप्त सामग्री से बदला जाता है, जबकि उसका रूप, बनावट या इस्तेमाल दूध से बने प्रोडक्ट जैसा हो सकता है।

आसान भाषा में कहें तो एनालॉग पनीर पूरी तरह दूध से बना पारंपरिक पनीर नहीं होता। इसमें वेजिटेबल फैट, स्टार्च, मिल्क सॉलिड, इमल्सीफायर और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।

असली पनीर और एनालॉग पनीर में क्या अंतर है?
असली पनीर मुख्य रूप से दूध को फाड़कर और उससे ठोस पदार्थ अलग करके तैयार किया जाता है। वहीं, एनालॉग पनीर में दूध के कुछ हिस्से की जगह गैर-डेयरी फैट और दूसरी सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है।

यही वजह है कि दोनों के स्वाद, बनावट, पोषण और कीमत में अंतर हो सकता है।

घर पर कैसे पहचानें एनालॉग या मिलावटी पनीर?
सबसे पहले फूड लेबल ध्यान से पढ़ें। पैक्ड प्रोडक्ट खरीदते समय देखें कि उस पर पनीर की प्रकृति और इस्तेमाल की गई सामग्री स्पष्ट रूप से लिखी है या नहीं।

पनीर की बनावट और गंध भी शुरुआती संकेत दे सकती है। बहुत ज्यादा रबर जैसा, असामान्य रूप से भुरभुरा या अलग तरह की गंध वाला पनीर संदिग्ध हो सकता है। हालांकि केवल स्वाद या बनावट के आधार पर पनीर को नकली साबित नहीं किया जा सकता।

आयोडीन टेस्ट से कैसे पता चलता है?
स्टार्च की मौजूदगी की शुरुआती जांच के लिए आयोडीन टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। पनीर के नमूने को उबालकर ठंडा करने के बाद आयोडीन डालने पर नीला रंग दिखाई देना स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।

लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह टेस्ट केवल स्टार्च की मौजूदगी का संकेत देता है, यह अपने आप में पनीर के एनालॉग या असुरक्षित होने का पक्का प्रमाण नहीं है। किसी प्रोडक्ट की सही पुष्टि के लिए लैब टेस्ट सबसे भरोसेमंद तरीका है।

क्या एनालॉग पनीर सेहत के लिए नुकसानदायक है?
एनालॉग पनीर को लेकर मुख्य चिंता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें कौन-कौन सी सामग्री, कितनी मात्रा में और किस गुणवत्ता की इस्तेमाल की गई है। वेजिटेबल फैट, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल अपने आप में किसी प्रोडक्ट को असुरक्षित साबित नहीं करता, लेकिन अगर किसी प्रोडक्ट को गलत तरीके से “पनीर” के रूप में बेचा जाए या वह खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन न करता हो, तो यह उपभोक्ता के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

इसलिए पनीर खरीदते समय लेबल, सामग्री, FSSAI लाइसेंस/विवरण और भरोसेमंद विक्रेता पर ध्यान देना बेहतर है। संदिग्ध प्रोडक्ट मिलने पर स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत की जा सकती है।

ज़्यादा सोडियम: कुछ प्रोडक्ट्स में सोडियम की मात्रा ज़्यादा हो सकती है, जो हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

कम न्यूट्रिशनल वैल्यू: एनालॉग पनीर में ताज़े डेयरी पनीर की तुलना में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पोषक तत्व कम हो सकते हैं, जिससे यह कम पौष्टिक विकल्प बन जाता है।

एनालॉग डेयरी पर बैन का असर: बढ़ सकते हैं खाने-पीने की चीजों के दाम, ₹20-60 तक महंगी हो सकती हैं डिशेज

एनालॉग चीज़, पनीर और बटर के इस्तेमाल पर लगाई गई पाबंदियों का असर अब ग्राहकों की जेब पर भी पड़ सकता है। भास्कर इंग्लिश की एक रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे फूड स्टॉल, कैफे और क्लाउड किचन में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले सस्ते एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स की जगह अब असली डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

एनालॉग प्रोडक्ट्स की लागत कम होने के कारण कई छोटे कारोबारी अपनी डिशेज की कीमत अपेक्षाकृत कम रख पाते थे। लेकिन अब असली दूध से बने पनीर, चीज़ और बटर का इस्तेमाल बढ़ने से उनकी लागत बढ़ सकती है।

₹20 से ₹60 तक बढ़ सकती है कीमत
रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबारियों की बढ़ी हुई लागत का असर सीधे ग्राहकों पर पड़ सकता है। पनीर, चीज़ और बटर से तैयार कुछ डिशेज की कीमतों में ₹20 से ₹60 तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

उदाहरण के तौर पर:
पनीर बटर मसाला: ₹220 से बढ़कर करीब ₹260
चीज़ क्लब सैंडविच: ₹200 से बढ़कर करीब ₹240
मार्गेरिटा पिज्जा: ₹150 से बढ़कर करीब ₹180

हालांकि, वास्तविक कीमतों में बढ़ोतरी अलग-अलग दुकानों और शहरों में अलग हो सकती है। यह कारोबारियों की लागत, इस्तेमाल होने वाले डेयरी उत्पादों और उनकी प्राइसिंग पर निर्भर करेगा।

ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा असर
एनालॉग डेयरी उत्पादों की तुलना में असली पनीर, चीज़ और बटर महंगे पड़ते हैं। ऐसे में अगर रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट पूरी तरह असली डेयरी प्रोडक्ट्स पर निर्भर होते हैं, तो इसका असर उनके मेन्यू की कीमतों पर पड़ सकता है।

यानी एनालॉग डेयरी पर कार्रवाई से जहां खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सही लेबलिंग को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं बाहर खाना खाने वाले ग्राहकों का बजट भी बढ़ सकता है।

(एजेंसी इनपुट्स के साथ)