अब, हमारा देश गरज ओलावृष्टि और बिजली गिरने के साथ-साथ प्री-मानसून बारिश और गरज के साथ बौछारों के एक और लंबे दौर के लिए तैयार है। इसके साथ, हिन्दुस्तान के कई हिस्सों में खड़ी फसल पर फसल के नुकसान का खतरा बढ़ रहा है।
पूरी दुनिया फिलहाल जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के विनाशकारी प्रभावों से जूझ रही है। ऐसे में तमाम देशों के लिए इसके प्रभावों को कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाना ज़रूरी होता जा रहा है। इस दिशा में अफ्रीकी देश सिएरा लियोन (Sierra Leone) से एक बेहद सकारात्मक खबर आ रही है।
राजस्थान और तमिलनाडु में सुधार की आवश्यकता, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल को करना चाहिए अपनी रिन्यूएबल बिजली क्षमता का अधिक उपयोग
यह साइकिल स्कूल सस्टेनेबल मोबिलिटी नेटवर्क और हेल्प दिल्ली ब्रीथ कलेक्टिव के साझा प्रयासों का नतीजा है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के लिए साइकिल चलाने के कौशल को सीखने और विकसित करने के लिए एक सुरक्षित और सहायक वातावरण बनाना है।
कॉर्पोरेट सोशल रिस्पोन्सिबिलिटी के क्षेत्र की कंपनी एज़ यू सो और कॉर्पोरेट नाइट्स नाम की मीडिया और रिसर्च कंपनी ने आज कार्बन क्लीन 200 नाम की एक सूची का 10वां अपडेट जारी किया है।
दुनिया में अपनी तरह के इस पहले विश्लेषण में विश्व भर के हर राज्य और प्रान्त की जलवायु का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। इस रिपोर्ट में पाया गया है कि भारत के नौ राज्य जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के आठ नुकसानदेह प्रभावों से होने वाली क्षति के सबसे गम्भीर खतरे वाले दुनिया के टॉप 50 क्षेत्रों की सूची में शामिल हैं।
साल 2008 में 21.46 डिग्री सेल्सियस के पिछले रिकॉर्ड की तुलना में दिसंबर 2022 के 21.49 डिग्री सेल्सियस के उच्चतम औसत तापमान के साथ साल 2022 को बीते 122 वर्षों के इतिहास में सबसे गर्म साल घोषित किया है।
एक नए अध्ययन से पता चला है कि देश में कार्बन एमिशन (Carbon Emissions) कम करने की गतिविधियों पर होने वाले खर्चे में 28 फीसद की कमी आयी है। इतना ही नहीं, विशेषज्ञों का मानना है साल 2030 तक भारत दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन बाज़ार (Carbon Market) बन जाएगा।
दुनिया में कार्बन बाजार (Carbon Market) पिछले करीब दो दशकों से मौजूद हैं और इनके उभार का सिलसिला अब भी जारी है। भारत के घरेलू कार्बन मार्केट की दिशा में हुए हाल के नीतिगत घटनाक्रमों को देखते हुए कारोबार जगत में इस बात को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है
जी20 शेरपा, श्री अमिताभ कांत के अनुसार, दो मुख्य समस्याएं हैं जो बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन (green hydrogen) का...
जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चिंता का विषय है, लेकिन यहाँ यह समझना महत्वपूर्ण है कि हर मौसम की घटना सीधे तौर पर इससे जुड़ी नहीं होती है।
कैम्ब्रिज इकोनोमेट्रिक्स (Cambridge Econometrics) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जीवाश्म-ईंधन (fossil fuel) से संबंधित चीजों, जैसे परिवहन और घरेलू...












