दुनिया की 24 सबसे बड़ी तथाकथित "क्लाइमेट लीडर" (Climate Leader) कंपनियों की जलवायु रणनीतियाँ (climate strategies) पूरी तरह से अपर्याप्त हैं और अस्पष्टता से घिरी हुई हैं।
लक्जमबर्ग (Luxembourg) स्थित आर्सेलर मित्तल (ArcelorMittal) कम्पनी को अगली मई में होने जा रही अपनी वार्षिक सभा में मुश्किल सवालों का सामना करने के लिये तैयार रहना चाहिये।
RSS प्रमुख ने कहा कि भगवान ने हमेशा बोला है कि मेरे लिए सभी एक हैं। उनमें कोई जाति, वर्ण नहीं है। लेकिन पंडितों ने श्रेणी बनाई, वो गलत था। देश में विवेक, चेतना सभी एक है, उसमें कोई अंतर नहीं। बस मत अलग-अलग हैं। धर्म को हमने बदलने की कोशिश नहीं की। बदलता है तो धर्म छोड़ दो। यह बाबा साहेब अम्बेडकर ने कहा है। परिस्थिति को कैसे बदलों, यह बताया है।
केन्द्रीय बजट 2023-24 पेश किया जा चुका है। यह बजट कुछ अलग है। क्योंकि इस बजट के पेश होने के बाद सिर्फ ऊपर लिखी रूटीन बातों की चर्चा नहीं हो रही। इस बजट में इस सबसे अलग कुछ था और अलग ये था कि इसे सब्ज़ स्याही से लिखा गया है।
भारत ने वर्ष 2025 तक 76 गीगावॉट यूटिलिटी स्केल सौर (solar power) और पवन बिजली (wind power) उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना बनाई है। इससे भारत 19.5 बिलियन डॉलर (1588 बिलियन रुपए) बचा सकता है। ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर (Global Energy Monitor) के ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है।
भारत का वित्तीय क्षेत्र एक लो-कार्बन एनेर्जी ट्रांज़िशन (low carbon energy transition) के जोखिमों के लिए बेहद संवेदनशील है, लेकिन एक मशहूर जर्नल में प्रकाशित नए पेपर की मानें तो इसके बावजूद भारत में छह में से सिर्फ एक फायनेंस प्रोफेशनल (finance professionals) उन जोखिमों की पहचान करने और उन्हें मैनेज करने का अनुभव रखता है।
फिक्र की बात यह है कि अल नीनो जैसे खतरनाक प्रभाव की वापसी हो रही है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़े मॉडल्स के अनुमानों के मुताबिक अल नीनो का प्रभाव मई-जुलाई के दौरान लौटने की सम्भावना है। यह अवधि गर्मी और मानसून के मौसम को आपस में जोड़ती है। मानसून की अवधि जून से सितंबर के बीच मानी जाती है।
विश्व मौसम विज्ञान विभाग (डब्ल्यूएमओ) ने 2013-2022 की अवधि के दौरान वैश्विक औसत समुद्र स्तर की वृद्धि पर एक रिपोर्ट जारी की है, और इसमें पता चले परिणाम चिंताजनक हैं।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) सतत विकास के लिए एकमात्र सबसे बड़ा खतरा बन कर खड़ा है और इसके व्यापक और अभूतपूर्व प्रभाव सबसे गरीब और सबसे कमजोर लोगों पर असमान रूप से अधिक दुष्प्रभाव डालते हैं। जलवायु परिवर्तन को रोकने और इसके दुष्प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई सभी सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को सफलतापूर्वक प्राप्त करने का अभिन्न अंग है।
जब आप और हम पठान फिल्म के बॉयकोट का समर्थन या विरोध कर रहे हैं, बीबीसी की किसी डॉक्युमेंट्री की राजनीति समझ रहे हैं, या फिर रज़ाई लपेट कर बढ़ती सर्दी का रोना रो रहे हैं, ठीक तब, लद्दाख में एक शख़्स पिघलते ग्लेशियरों की तरफ हम सबका ध्यान खींचने के लिए खुले आसमान के नीचे अनशन कर रहा है।
देश की पूरी स्टील इंडस्ट्री को प्रेरणा देते हुए, भारत के अग्रणी स्टील निर्माताओं में से एक, जेएसडब्ल्यू स्टील, ResponsibleSteel™ का सदस्य बन गया है।
अल जाबेर ने पहले कई बार जलवायु परिवर्तन के खतरों के बारे में चेतावनी दी है और क्लीन एनेर्जी में निवेश करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की योजनाओं की रूपरेखा भी तैयार की है, लेकिन उन्होंने 2030 तक जीवाश्म ईंधन निवेश में $600 बिलियन की वार्षिक वृद्धि की वकालत भी की है और यह भी कहा है कि अब ज़रूरत है ऐसे दृष्टिकोण की जिसमें तेल और गैस उद्योग की प्रासंगिकता भी शामिल हो।












