अभी कुछ समय पहले तक उत्तराखंड (Uttarakhand) का रैनी गाँव सुर्खियों में था और अब, पास का ही जोशीमठ (Joshimath) खबरों में है। फिलहाल प्रशासन वहाँ से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्स्थापित करने की कवायद में है और विशेषज्ञ अपनी अपनी समझ से समस्या के कारणों पर गौर कर रहे हैं।
सर्दियों की आमद ने एक बार फिर गंगा के मैदानी इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक को 'खराब' और 'गंभीर' श्रेणियों के बीच ला खड़ा कर दिया है। बात की गंभीरता इसिस से पता चलती है कि दिल्ली-एनसीआर में दिसंबर के पहले पखवाड़े के सबसे तेज़ धूप और खुले आसमान वाले दिनों पर भी वायु गुणवत्ता 'खराब' (Air Pollution) की श्रेणी में ही रही।
सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी (CFA) की नई रिपोर्ट 'द कोल टेल : ट्रैकिंग इन्वेस्टमेंट्स इन कोल फायर्ड थर्मल पावर प्लांट्स इन इंडिया' ने देश में कोयले से चलने वाले बिजली घरों (coal power generation) को दी गई वित्तीय सहायता का खुलासा करते हुए बताया है कि साल 2005 से 2022 के बीच भारत में 84 राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय ऋणदाताओं ने 1000 मेगा वाट या उससे ज्यादा की क्षमता वाले थर्मल पावर प्लांट संबंधी परियोजनाओं के लिए 7.62 लाख करोड़ रुपए का कर्ज उपलब्ध कराया है।
जिस दिन तमिलनाडु चक्रवात मंडौस (Cyclone Mandaus) के तट पर दस्तक देने की तैयारी कर रहा था, ठीक उसी दिन राज्य सरकार ने तमिलनाडु जलवायु परिवर्तन (Climate Change) मिशन के शुभारंभ के साथ जलवायु लचीलापन की दिशा में काम करने की अपनी तैयारियों और प्रतिबद्धता पर फिर से जोर दिया है।
हालिया अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली नगर निगम (MCD) के 94.8% अधिकारी वायु प्रदूषण के बारे में तो जानते थे, लेकिन राष्ट्रीय नीतियों और वायु प्रदूषण (Air Pollution) के स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में निगम के फील्ड कार्यकर्ताओं के बीच कम जानकारी थी।
संयुक्त राष्ट्र की 27वीं जलवायु वार्ता (27th Climate Talks), या कॉप 27 (COP 27), आज मिस्र में समाप्त हुई। जहां एक ओर इस सम्मेलन में जलवायु संकट (Climate Crisis) के सबसे कमजोर लोगों पर असर को कम करने पर अहम फैसले लिए गए, वहीं इस वार्ता में ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारणों को दूर करने के लिए कुछ खास देखने या सुनने को नहीं मिला।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Program) ने आज चार साल पूरे कर लिए और इसमें अब तक ₹6897.06 करोड़ खर्च हो चुके हैं। मगर 2019 पहचाने गए कुछ शीर्ष प्रदूषित शहरों ने अपने पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में बस मामूली सुधार ही दर्ज किया है और यह अब भी केंद्र सरकार द्वारा स्थापित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सुरक्षित सीमा मानकों से अधिक स्तर पर हैं।
भारत द्वारा अक्षय ऊर्जा (renewable energy) और इलेक्ट्रिक वाहनों (electric vehicles) पर दी जाने वाली सब्सिडी वित्तीय वर्ष 2022 में दोगुनी से भी ज्यादा हो गयी है। मगर सरकार के सामने आने वाले वर्षों में देश के जलवायु सम्बन्धी लक्ष्यों को हासिल करने के लिये इस रफ्तार को बनाये रखने की चुनौती होगी।
कोलम्बिया सेंटर ऑन सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट (CCSI) ने आज रेन्युबल ऊर्जा में निवेश के कारकों और उसमें आने वाली बाधाओं पर आधारित अपनी दो नयी रिपोर्टें पेश कीं।
साल 2021 में कोयले और रिन्यूबल स्त्रोतों से जुड़ी ऊर्जा परियोजनाओं की एक एनालिसिस से पता चलता है कि साल 2021 में कोयला बिजली परियोजनाओं के लिए कोई नया वित्तपोषण नहीं किया गया था। इतना ही नहीं, 2021 में नई ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कुल वित्तपोषण, वित्त वर्ष 2017 के स्तर की तुलना में 60% कम था।
सोलर एनेर्जी के क्षेत्र में महिलाओं के लिए कमाई के अवसरों को बनाने की एक पहल को शुरू करते हुए केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट मामलों की मंत्री, निर्मला सीतारमण, ने कहा "अब देश का ध्यान महिला विकास से हटकर महिलाओं की अगुवाई में विकास पर केंद्रित हो गया है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से गंभीर प्रभावों से बचने के लिए दुनिया को कोयले के जलने से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के लिए तेजी से आगे आना चाहिए। ऐसा कुछ करने के लिए ज़रूरी है कि कोयले के स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों के लिए बड़े पैमाने पर वित्तपोषण को तेजी से बढ़ाया जाए और तत्काल नीति कार्रवाई सुनिश्चित कि जाए।

