गुतेरस का यह बयान बाढ़ प्रभावित पाकिस्तान की यात्रा से लौटेने के बाद आया है और इस बयान ने साफ इशारा किया है कि पाकिस्तान के हालात और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) केंद्रीय मुद्दा रहेगा संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के उच्च-स्तरीय 77वें सत्र का।
वैश्विक स्तर पर शुद्ध ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के मामले में स्वास्थ्य क्षेत्र पांचवें स्थान पर है। ऐसे में देश की स्वास्थ्य क्षेत्र की तैयारियों को जलवायु परिवर्तन के दृष्टिगत संबोधित करने के महत्व पर चर्चा करने के लिए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के साथ साझेदारी में एशियाई विकास बैंक ने आज गोवा में G20 के लिए स्वास्थ्य कार्य समूह में एक साइड इवेंट का आयोजन किया।
दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण का संकट विकासशील देशों के लिए खास तौर से बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।...
विश्व संसाधन संस्थान के अनुसार हमारे वन, कुल CO2 उत्सर्जन का 30% अवशोषित कर लेते हैं। वनों की कटाई का...
इस साल फरवरी में शुरू हुए यूक्रेन (Ukraine) और रूस (Russia) के बीच युद्ध के फैलने और रूस पर वैश्विक प्रतिबंधों के बाद से, तेल की कीमतें (Oil Price) नियंत्रण से बाहर हो गई हैं, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड उच्च वृद्धि हुई है।
वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकारी मुस्तैदी के साथ-साथ जनजागरूकता बेहद ज़रूरी, यह कहना है पद्मश्री पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा का...
साल 2021 की पहली छमाही में बढ़ती वैश्विक बिजली की मांग ने स्वच्छ बिजली में वृद्धि को पीछे छोड़ दिया,...
जलवायु प्रतिबद्धताओं के बावजूद, सार्वजनिक संस्थान प्राकृतिक गैस के लिए, पवन या सौर के मुक़ाबले, चार गुना ज़्यादा फंड प्रदान...
एक अध्ययन से पता चलता है कि कार्बन उत्सर्जन में तात्कालिक तौर से कटौती न करने की वजह से G20...
जब आप और हम पठान फिल्म के बॉयकोट का समर्थन या विरोध कर रहे हैं, बीबीसी की किसी डॉक्युमेंट्री की राजनीति समझ रहे हैं, या फिर रज़ाई लपेट कर बढ़ती सर्दी का रोना रो रहे हैं, ठीक तब, लद्दाख में एक शख़्स पिघलते ग्लेशियरों की तरफ हम सबका ध्यान खींचने के लिए खुले आसमान के नीचे अनशन कर रहा है।
कोरबा देश के 16% से अधिक कोयले का उत्पादन करता है। यह बिजली उत्पादन का केंद्र भी है, जिसकी थर्मल पावर क्षमता 6,428 मेगावाट है।
'भारत में कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव' नामक एक हालिया विश्लेषण में, क्लाइमेट ट्रेंड्स ने बदलते ग्रीष्मकालीन मानसून के प्रति भारत की कृषि की संवेदनशीलता को दर्शाने वाले साक्ष्य जुटाये हैं।



