RSS प्रमुख ने कहा कि भगवान ने हमेशा बोला है कि मेरे लिए सभी एक हैं। उनमें कोई जाति, वर्ण नहीं है। लेकिन पंडितों ने श्रेणी बनाई, वो गलत था। देश में विवेक, चेतना सभी एक है, उसमें कोई अंतर नहीं। बस मत अलग-अलग हैं। धर्म को हमने बदलने की कोशिश नहीं की। बदलता है तो धर्म छोड़ दो। यह बाबा साहेब अम्बेडकर ने कहा है। परिस्थिति को कैसे बदलों, यह बताया है।
इस साझेदारी में 13 और सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान और यूनाइटेड किंगडम जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य दुनिया भर में महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में निवेश को प्रोत्साहित करना है।
अनमोल कुमार कोरोना (Corona) की तीसरी लहर (Third Wave) जिस तेजी से देश में फैली है, उसने सभी को चकित...
ताज़ा मिली जानकारी के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पेरिस समझौते के बाद से अपने आधे से अधिक सदस्य देशों...
दुनिया की आधी से ज़्यादा आबादी ऐसे शहरों में रहती है जहाँ दुनिया की तीन चौथाई बिजली की खपत होती...
वैश्विक मामलों के थिंकटैंक ओडीआई की एक ताजा रिसर्च में यह बात सामने आई है कि निम्न और मध्यम आमदनी वाले देशों में जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) के खनन से संबंधित कर्ज के कुचक्र से वैश्विक स्तर पर एनेर्जी ट्रांज़िशन को खतरा उत्पन्न हो रहा है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खिलाफ़ लड़ाई वैश्विक है। और इस लड़ाई में हमारा सबसे बड़ा हथियार जानकारी है। जानकारी...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) की जर्मनी (Germany) में हुए जी-7 (G7) सम्मेलन में मौजूदगी ने जहां एक ओर दुनिया के पटल पर भारत की प्रासंगिकता को एक बार फिर साबित किया, वहीं प्रधानमंत्री ने इस वैश्विक मंच का भरपूर फायदा उठाते हुए दुनिया को न सिर्फ़ शांति का संदेश दिया बल्कि यह भी साफ़ किया कि जलवायु गुणवत्ता (climate quality) के प्रति भारत का निश्चय उसके प्रदर्शन से साफ़ झलकता है और दुनिया को उससे सीखना चाहिए।
ताज़ा मिली जानकारी के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पेरिस समझौते के बाद से अपने आधे से अधिक सदस्य देशों...
सभी देश और वहाँ की स्वास्थ्य प्रणालियाँ COVID-19 महामारी के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों से उबर ही रही थीं कि ठीक तब ही रूस और यूक्रेन के संघर्ष ने एक वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया। और इस सब के साथ जलवायु परिवर्तन (Climate change) बेरोकटोक अपनी गति से बढ़ता चला जा रहा है।
दुनिया की आधी से ज़्यादा आबादी ऐसे शहरों में रहती है जहाँ दुनिया की तीन चौथाई बिजली की खपत होती...
एक के बाद एक वैज्ञानिक सबूत हमारे सामने आते जा रहे हैं जो साफ कर रहे हैं कि बीती जुलाई मानव इतिहास, या उससे पहले के कालखंड की भी सबसे अधिक गरम जुलाई थी।




