जब आप और हम पठान फिल्म के बॉयकोट का समर्थन या विरोध कर रहे हैं, बीबीसी की किसी डॉक्युमेंट्री की राजनीति समझ रहे हैं, या फिर रज़ाई लपेट कर बढ़ती सर्दी का रोना रो रहे हैं, ठीक तब, लद्दाख में एक शख़्स पिघलते ग्लेशियरों की तरफ हम सबका ध्यान खींचने के लिए खुले आसमान के नीचे अनशन कर रहा है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) सतत विकास के लिए एकमात्र सबसे बड़ा खतरा बन कर खड़ा है और इसके व्यापक और अभूतपूर्व प्रभाव सबसे गरीब और सबसे कमजोर लोगों पर असमान रूप से अधिक दुष्प्रभाव डालते हैं। जलवायु परिवर्तन को रोकने और इसके दुष्प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई सभी सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को सफलतापूर्वक प्राप्त करने का अभिन्न अंग है।
विश्व मौसम विज्ञान विभाग (डब्ल्यूएमओ) ने 2013-2022 की अवधि के दौरान वैश्विक औसत समुद्र स्तर की वृद्धि पर एक रिपोर्ट जारी की है, और इसमें पता चले परिणाम चिंताजनक हैं।
फिक्र की बात यह है कि अल नीनो जैसे खतरनाक प्रभाव की वापसी हो रही है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़े मॉडल्स के अनुमानों के मुताबिक अल नीनो का प्रभाव मई-जुलाई के दौरान लौटने की सम्भावना है। यह अवधि गर्मी और मानसून के मौसम को आपस में जोड़ती है। मानसून की अवधि जून से सितंबर के बीच मानी जाती है।
कैम्ब्रिज इकोनोमेट्रिक्स (Cambridge Econometrics) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जीवाश्म-ईंधन (fossil fuel) से संबंधित चीजों, जैसे परिवहन और घरेलू...
जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चिंता का विषय है, लेकिन यहाँ यह समझना महत्वपूर्ण है कि हर मौसम की घटना सीधे तौर पर इससे जुड़ी नहीं होती है।
केन्द्रीय बजट 2023-24 पेश किया जा चुका है। यह बजट कुछ अलग है। क्योंकि इस बजट के पेश होने के बाद सिर्फ ऊपर लिखी रूटीन बातों की चर्चा नहीं हो रही। इस बजट में इस सबसे अलग कुछ था और अलग ये था कि इसे सब्ज़ स्याही से लिखा गया है।
RSS प्रमुख ने कहा कि भगवान ने हमेशा बोला है कि मेरे लिए सभी एक हैं। उनमें कोई जाति, वर्ण नहीं है। लेकिन पंडितों ने श्रेणी बनाई, वो गलत था। देश में विवेक, चेतना सभी एक है, उसमें कोई अंतर नहीं। बस मत अलग-अलग हैं। धर्म को हमने बदलने की कोशिश नहीं की। बदलता है तो धर्म छोड़ दो। यह बाबा साहेब अम्बेडकर ने कहा है। परिस्थिति को कैसे बदलों, यह बताया है।
लक्जमबर्ग (Luxembourg) स्थित आर्सेलर मित्तल (ArcelorMittal) कम्पनी को अगली मई में होने जा रही अपनी वार्षिक सभा में मुश्किल सवालों का सामना करने के लिये तैयार रहना चाहिये।
दुनिया की 24 सबसे बड़ी तथाकथित "क्लाइमेट लीडर" (Climate Leader) कंपनियों की जलवायु रणनीतियाँ (climate strategies) पूरी तरह से अपर्याप्त हैं और अस्पष्टता से घिरी हुई हैं।
दुनिया में अपनी तरह के इस पहले विश्लेषण में विश्व भर के हर राज्य और प्रान्त की जलवायु का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। इस रिपोर्ट में पाया गया है कि भारत के नौ राज्य जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के आठ नुकसानदेह प्रभावों से होने वाली क्षति के सबसे गम्भीर खतरे वाले दुनिया के टॉप 50 क्षेत्रों की सूची में शामिल हैं।
कॉर्पोरेट सोशल रिस्पोन्सिबिलिटी के क्षेत्र की कंपनी एज़ यू सो और कॉर्पोरेट नाइट्स नाम की मीडिया और रिसर्च कंपनी ने आज कार्बन क्लीन 200 नाम की एक सूची का 10वां अपडेट जारी किया है।












