भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) मंत्रालय ने 'ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी)' कार्यान्वयन नियमों के मसौदे को सार्वजनिक करते हुए एक बेहतर और पर्यावरण हित में एक साहसिक कदम उठाया है।
बारिश की आमद गर्मी से राहत देने के लिए जानी जाती थी। मगर अब, यह राहत बन रही है आफत। भारत में चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि का पैमाना हर गुजरते साल के साथ नई ऊंचाई छू रहा है।
इन दिनों मणिपुर भारतीय राष्ट्रवाद की परीक्षा ले रहा है। भारत की यह मणि टूट रही है। भारत मां के 120 बच्चे उसकी गोद में हमेशा के लिए सो चुके हैं। कोई 45,000 बेघर हो चुके हैं। 2 महीने से ऊपर हो चुके, लेकिन खून के छींटे बंद नहीं हुए हैं।
स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) द्वारा शिकागो की विश्व धर्म महासभा में 11 सितंबर 1893 को दिए भाषण की याद कर हर हिंदू और हर भारतीय का सीना चौड़ा हो जाता है।
जर्मनी की लाइपजिग यूनीवर्सिटी में हुए ताज़ा शोध की मानें तो इस साल, बीते लगभग सवा लाख साल बाद जुलाई का महीना सबसे गर्म रहेगा।
एक के बाद एक वैज्ञानिक सबूत हमारे सामने आते जा रहे हैं जो साफ कर रहे हैं कि बीती जुलाई मानव इतिहास, या उससे पहले के कालखंड की भी सबसे अधिक गरम जुलाई थी।
एक नए विश्लेषण के अनुसार, वायु प्रदूषण (Air Pollution) के खिलाफ भारत की लड़ाई केवल उसके शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों तक भी फैली हुई है।
कुछ तो है गांधी में जो भाजपा के गले की हड्डी बना हुआ है। देश में भले ही भाजपा के नेता राष्ट्रपिता के हत्यारे का महिमामंडन कर लें, लेकिन विदेश में जाकर मोदी जी यह नहीं कह सकते कि मैं गोडसे के देश से आया हूं।
ग्लोबल स्टील प्लांट ट्रैकर के डेटा के वार्षिक सर्वेक्षण में पाया गया है कि कोयला आधारित स्टील उत्पादन क्षमता में वृद्धि का लगभग पूरा काम (99 प्रतिशत) एशिया में ही हो रहा है और चीन तथा भारत की इन परियोजनाओं में कुल हिस्सेदारी 79 प्रतिशत है।
भारत की मेजबानी में इस साल गोवा में चौथी G20 एनर्जी ट्रांज़िशन वर्किंग ग्रुप (ETWG) की बैठक आयोजित की गयी। उम्मीद थी कि इस बैठक के नतीजे दुनिया को प्रदूषण मुक्त ऊर्जा व्यवस्था की ओर बढ्ने में मदद करेंगे।
मणिपुर तो सचमुच शर्मनाक घटना है लेकिन हिंसा, हत्या और रेप तो बाकी जगह भी होते हैं, सबके बारे में क्यों नहीं बोलते आप?
आई.आई.टी. दिल्ली के 3 शोधकर्ताओं की नवीनतम रिसर्च देश के नीति निर्माताओं को शराबबंदी (prohibition) के सवाल पर नए सिरे से सोचने को मजबूर कर सकती है।











